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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 6

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 6 — दशरथ के चारों कुमारों को देखकर जनकपुरवासियों का आनंद; प्रशंसनीय सौभाग्य का उत्तम शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। प्रथम सर्ग के पाँचवें सप्तक का छठा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राम-नाम के प्रभाव से बनने वाले शुभ योग की झलक मिलती है।

चारों कुमारों का दर्शन और सौभाग्य की प्रशंसा — उत्तम प्रश्न-फल।

मूल दोहा: चारि चारु दसरथ कुँवर निरखि मुदित पुर लोग। कोसलेस मथिलेस को समउ सराहन जोग॥६॥

शब्दार्थ:

  • चारि चारु = चारों सुंदर
  • कुँवर = कुमार
  • निरखि = देखकर
  • मुदित = प्रसन्न
  • पुर लोग = नगरवासी
  • कोसलेस = कोसलनरेश (दशरथजी)
  • मथिलेस = मिथिलेश (जनकजी)
  • सराहन जोग = प्रशंसा करने योग्य

निरखि मुदित पुर लोग = देखकर नगरवासी आनंदित हो रहे हैं। समउ सराहन जोग = यह समय प्रशंसा करने योग्य है।

भावार्थ / व्याख्या:

महाराज दशरथ के चारों सुंदर कुमारों को देखकर जनकपुर के लोग आनंदित हो रहे हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि महाराज दशरथ तथा महाराज जनक का यह समय, यह सौभाग्य, प्रशंसा करने योग्य है।

‘समउ सराहन जोग’ अर्थात् समय ही ऐसा है जिसकी प्रशंसा की जाए। यह उस दुर्लभ अवस्था का वर्णन है जब सब कुछ अनुकूल हो — संतान योग्य हो, संबंध उत्तम हो, और लोग प्रशंसा कर रहे हों।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा बताता है कि प्रश्नकर्ता का समय अनुकूल है। जो कार्य किया जाएगा, उसकी सराहना होगी और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

शकुन फल:

यह शकुन उत्तम है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:

  • संतान की उपलब्धि, शिक्षा या विवाह
  • समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान बढ़ना
  • पारिवारिक सौभाग्य और समृद्धि
  • सार्वजनिक रूप से प्रशंसा या मान्यता
  • किसी शुभ अवसर या आयोजन का समय चुनना

इस दोहे के आने पर प्रश्न का फल उत्तम है। समय अनुकूल है, कार्य की सराहना होगी और परिवार में प्रसन्नता रहेगी।

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