रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 7 — एक ही मंडप में चारों कुमारों का विवाह; मांगलिक कार्यों में उत्तम फल का शकुन।
प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। प्रथम सर्ग के पाँचवें सप्तक का सातवाँ दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राम-नाम के प्रभाव से बनने वाले शुभ योग की झलक मिलती है।
एक ही मंडप में चारों विवाह — मांगलिक कार्यों का उत्तम शकुन।
मूल दोहा: एक बितान बिबाहि सब सुवन सुमंगल रूप। तुलसी सहित समाज सुख सुकृत सिंधु दोउ भूप॥७॥
शब्दार्थ:
- एक बितान = एक ही मंडप के नीचे
- बिबाहि = विवाह करके
- सुवन = पुत्र
- सुमंगल रूप = मंगल के मूर्तिमान रूप
- सहित समाज = समाज के साथ
- सुकृत सिंधु = पुण्य के समुद्र
- दोउ भूप = दोनों राजा
एक बितान बिबाहि सब = एक ही मंडप के नीचे सबका विवाह करके। सुकृत सिंधु दोउ भूप = दोनों नरेश पुण्य के समुद्र हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
तुलसीदास जी कहते हैं कि पुण्य के समुद्र स्वरूप दोनों नरेश — दशरथजी और जनकजी — एक ही मंडप के नीचे सुमंगल के मूर्तिमान रूप चारों पुत्रों का विवाह करके समाज के साथ सुखी हो रहे हैं।
‘एक बितान’ शब्द विशेष महत्व रखता है। चारों विवाह अलग-अलग नहीं, एक ही मंडप के नीचे हुए। यह एकता, समरसता और सामूहिक मंगल का प्रतीक है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा विवाह और मांगलिक कार्यों में सर्वोत्तम फल का सूचक है। साथ ही यह उन प्रश्नों में भी शुभ है जहाँ एक साथ कई कार्य पूरे होने हों, या पूरे परिवार का सामूहिक आयोजन विषय हो।
शकुन फल:
यह शकुन विवाह और मंगल-कार्यों में उत्तम फल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- विवाह और वैवाहिक आयोजन
- एक साथ कई मांगलिक कार्य कराना
- संयुक्त परिवार का सामूहिक निर्णय
- बड़ा आयोजन, समारोह या उत्सव
- कई लंबित कार्यों का एक साथ पूर्ण होना
इस दोहे के आने पर विवाह आदि मंगल-कार्य संबंधी प्रश्न का फल उत्तम है। आयोजन सफल होगा और पूरे परिवार को सुख मिलेगा।
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