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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 3 — दशरथ-जनक मिलन का वसंत ऋतु रूपक; शुभ कार्यों में सुखद फल का शकुन।

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शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। प्रथम सर्ग के पाँचवें सप्तक का तीसरा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राम-नाम के प्रभाव से बनने वाले शुभ योग की झलक मिलती है।

दशरथ और जनक के मिलन को वसंत ऋतु का रूपक — शुभ कार्यों का सुखद फल।

मूल दोहा: मधु माधव दसरथ जनक, मिलब राज रितुराज। सगुन सुवन नव दल सुतरु, फुलत फलत सुकाज॥३॥

शब्दार्थ:

  • मधु माधव = चैत्र और वैशाख मास
  • मिलब = मिलन
  • रितुराज = ऋतुओं का राजा (वसंत)
  • सुवन = कोंपल, नया पत्ता
  • नव दल = नए पत्ते
  • सुतरु = उत्तम वृक्ष
  • फुलत फलत = फूलते और फलते हैं

मिलब राज रितुराज = उनका मिलन ऋतुराज वसंत है। फुलत फलत सुकाज = शुभ कार्य रूपी पुष्प और फल देते हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

तुलसीदास जी महाराज दशरथ और महाराज जनक की तुलना चैत्र और वैशाख मास से करते हैं, और उनके मिलन को ऋतुराज वसंत कहते हैं।

इस समय के शकुन उत्तम वृक्ष से नई कोंपल फूटने के समान हैं, जो आगे चलकर शुभ कार्य रूपी पुष्प और फल देते हैं।

यह रूपक शकुन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। वसंत में जो कोंपल फूटती है, वह तुरंत फल नहीं देती — पर उसका फल निश्चित होता है। इसी प्रकार यह दोहा बताता है कि आपके शुभ कार्य का बीज पड़ चुका है; धैर्य रखें, फल अवश्य मिलेगा और सुखदायक होगा।

शकुन फल:

यह शकुन शुभ कार्यों में सुखद फल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • नए कार्य या उद्यम का शुभारंभ
  • दो पक्षों का मिलना, गठजोड़ या संधि
  • विवाह या नए संबंध की शुरुआत
  • खेती, बागवानी या दीर्घकालिक निवेश
  • ऐसा कार्य जिसका फल कुछ समय बाद मिलना हो

इस दोहे के आने पर शुभ कार्य संबंधी प्रश्न का फल सुखदायक है। आरंभ उत्तम है — धैर्य रखें, समय आने पर पूरा फल मिलेगा।

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