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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 1

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 1 — धनुष-भंग पर अभिमानी राजाओं की मलिनता और प्रियजनों का आनंद; विपक्ष पर विजय का शकुन।

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गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। प्रथम सर्ग के पाँचवें सप्तक का पहला दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राम-नाम के प्रभाव से बनने वाले शुभ योग की झलक मिलती है।

धनुष-भंग के बाद का दृश्य — विपक्ष पर विजय का शकुन।

मूल दोहा: मन मलीन मानी महिप कोक कोकनद बृंद। सुहृद समाज चकोर चित प्रमुदित परमानंद॥१॥

शब्दार्थ:

  • मन मलीन = मन मलिन, उदास
  • मानी महिप = अभिमानी राजा
  • कोक = चकवा पक्षी
  • कोकनद = लाल कमल
  • बृंद = समूह
  • सुहृद समाज = प्रियजनों का समाज
  • चकोर चित = चकोर के समान चित्त
  • परमानंद = परम आनंद

मन मलीन मानी महिप = अभिमानी राजाओं का मन मलिन हो गया। सुहृद समाज चकोर चित = प्रियजनों का चित्त चकोर के समान प्रसन्न हो गया।

भावार्थ / व्याख्या:

श्रीराम द्वारा धनुष तोड़े जाने पर दो विपरीत प्रतिक्रियाएँ हुईं। अभिमानी राजाओं का मन चकवा पक्षी और लाल कमल के समान मलिन हो गया — क्योंकि चन्द्रोदय होते ही ये दोनों मुरझा जाते हैं। वहीं महाराज जनक के प्रियजनों का चित्त चकोर के समान परम आनंद से भर गया, क्योंकि चकोर चन्द्रमा को देखकर ही प्रसन्न होता है।

तुलसीदास जी का यह रूपक अद्भुत है। एक ही घटना — श्रीराम का उदय — किसी के लिए अंधकार और किसी के लिए प्रकाश बन गई। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति का हृदय कैसा है।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा विपक्ष पर विजय का स्पष्ट संकेत देता है। जो विरोधी आपके विरुद्ध खड़े हैं, वे निराश होंगे और आपके शुभचिंतक प्रसन्न होंगे।

शकुन फल:

यह शकुन विपक्ष पर विजय सूचित करता है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम आपके पक्ष में रहेगा:

  • मुकदमा, विवाद या कानूनी लड़ाई
  • प्रतियोगिता, चुनाव या प्रतिस्पर्धा
  • व्यापार में प्रतिद्वंद्वी से मुकाबला
  • किसी विरोधी या शत्रु से संबंधित प्रश्न
  • अपनी योग्यता सिद्ध करने का अवसर

इस दोहे के आने पर विपक्ष पर विजय का संकेत मिलता है। विरोधियों का प्रयास निष्फल होगा और आपके शुभचिंतक प्रसन्न होंगे। आत्मविश्वास बनाए रखें।

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