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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 3 — श्रवणकुमार प्रसंग और दशरथ को मिले शाप का वर्णन; यह शकुन अनिष्ट की सूचना देता है।

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शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। प्रस्तुत दोहा प्रथम सर्ग के दूसरे सप्तक में तीसरा स्थान पर आता है, जहाँ श्रीराम की महिमा और कार्य-सिद्धि के संकेत मिलते हैं।

यह सप्तक का एकमात्र अशुभ संकेत देने वाला दोहा है — श्रवणकुमार प्रसंग से जुड़ा।

मूल दोहा: बिधिबस बन मृगया फिरत दीन्ह अन्ध मुनि साप। सो सुनि बिपति बिषाद बड़, प्रजहिं सोक संताप॥३॥

शब्दार्थ:

  • बिधिबस = दैववश, भाग्य के वश
  • मृगया = आखेट, शिकार
  • दीन्ह = दे दिया
  • अन्ध मुनि = अंधे मुनि (श्रवणकुमार के माता-पिता)
  • साप = शाप
  • बिपति = विपत्ति
  • बिषाद = गहरा दुःख
  • संताप = संताप, जलन

बिधिबस बन मृगया फिरत = दैववश वन में शिकार के लिए घूमते समय। प्रजहिं सोक संताप = प्रजा को शोक और संताप हुआ।

भावार्थ / व्याख्या:

यह दोहा रामायण के उस मार्मिक प्रसंग की ओर संकेत करता है जब महाराज दशरथ वन में आखेट के लिए घूम रहे थे और शब्दभेदी बाण से अनजाने में श्रवणकुमार का वध हो गया। उनके अंधे माता-पिता ने दशरथ को पुत्र-वियोग में मृत्यु का शाप दे दिया।

जब यह समाचार अयोध्या पहुँचा तो प्रजा को बड़ी विपत्ति का बोध हुआ और चारों ओर शोक तथा संताप छा गया।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा स्पष्ट रूप से अनिष्ट का सूचक है। यह चेतावनी देता है कि वर्तमान परिस्थिति में जल्दबाज़ी या असावधानी से कोई ऐसी भूल हो सकती है जिसका परिणाम दीर्घकाल तक भुगतना पड़े। तुलसीदास जी का ‘बिधिबस’ शब्द बताता है कि यह भूल जान-बूझकर नहीं, अनजाने में होती है — इसलिए विशेष सावधानी आवश्यक है।

शकुन फल:

यह शकुन अनिष्ट की सूचना देता है। निम्नलिखित प्रश्नों में सावधानी बरतें:

  • नया कार्य या निवेश आरंभ करने का विचार
  • यात्रा, विशेषकर लंबी या अपरिचित मार्ग की
  • विवाद, मुकदमा या कानूनी मामला
  • स्वास्थ्य या दुर्घटना से जुड़ी आशंका
  • कोई निर्णय जिसमें जल्दबाज़ी की जा रही हो

इस दोहे के आने पर कार्य को कुछ समय के लिए स्थगित करना उचित है। यदि आगे बढ़ना ही हो तो अत्यंत सावधानी बरतें, विशेषज्ञ की सलाह लें और किसी का अहित न हो — इसका विशेष ध्यान रखें। श्रीराम का स्मरण और सत्कर्म इस समय सबसे बड़ा संबल है।

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