रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 7 — तुलसी, राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान के स्मरण से सोचा हुआ कार्य करने पर दिनोंदिन कल्याण का शकुन।
प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। यह पहले सप्तक का सातवाँ दोहा है। प्रथम सर्ग वंदना और मंगलाचरण से आरंभ होता है, इसलिए इसके अधिकांश दोहे शुभ फल के सूचक माने गए हैं।
यह सप्तक का अंतिम दोहा है, जिसमें तुलसीदास जी स्वयं आश्वासन देते हैं।
मूल दोहा: तुलसी तुलसी राम सिय, सुमिरि लखनु हनुमान। काजु बिचारेहु सो करहु, दिनु दिनु बड़ कल्यान॥७॥
शब्दार्थ:
- तुलसी = तुलसीदास जी (तथा तुलसी का पौधा)
- राम = श्री रामजी
- सिय = श्री जानकीजी (सीताजी)
- लखनु = श्री लक्ष्मणजी
- हनुमान = श्री हनुमानजी
- बिचारेहु = सोचा है, विचार किया है
- दिनु दिनु = दिनोंदिन, प्रतिदिन
- बड़ कल्यान = बड़ा कल्याण
काजु बिचारेहु सो करहु = जो कार्य सोचा है, उसे करो। दिनु दिनु बड़ कल्यान = दिनोंदिन बड़ा कल्याण होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
प्रथम सप्तक के इस अंतिम दोहे में गोस्वामी तुलसीदास जी तुलसी (पौधे), श्री रामजी, जानकीजी, लक्ष्मणजी और हनुमानजी का स्मरण करने का उपदेश देते हैं।
इसके बाद वे एक बहुत स्पष्ट आदेश देते हैं — ‘काजु बिचारेहु सो करहु’, अर्थात् जो कार्य तुमने मन में सोचा है, संकोच छोड़कर उसे कर डालो। यह दोहा उन लोगों के लिए है जो निर्णय ले चुके हैं परंतु आरंभ करने में हिचकिचा रहे हैं।
तुलसीदास जी आश्वासन देते हैं कि दिनोंदिन बड़ा कल्याण होगा। ‘दिनु दिनु’ शब्द बताता है कि फल एक बार नहीं मिलेगा, बल्कि प्रतिदिन बढ़ता जाएगा। इसलिए यह दोहा सभी प्रकार के कार्यों में सफलता का अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है।
शकुन फल:
यह शकुन सभी प्रकार के कार्यों में सफलता सूचित करता है। विशेष रूप से:
- वह कार्य जो आप पहले से करने का विचार कर रहे हैं
- निर्णय लेने में हो रही देरी या असमंजस
- व्यापार, नौकरी या निवेश का नया कदम
- विवाह, संतान या गृहस्थी संबंधी निर्णय
- किसी भी प्रकार का शुभ आरंभ
इस दोहे के आने पर आपके सोचे हुए कार्य को करने की स्पष्ट अनुमति और आशीर्वाद मिलता है। संकोच त्यागकर आगे बढ़ें — परिणाम दिनोंदिन बेहतर होता जाएगा।
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