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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 6

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 6 — शुक्र, गुरु, शारदा, गणपति, लक्ष्मण और हनुमान के स्मरण से व्यवस्था और परिणाम दोनों उत्तम होने का शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। यह पहले सप्तक का छठा दोहा है। प्रथम सर्ग वंदना और मंगलाचरण से आरंभ होता है, इसलिए इसके अधिकांश दोहे शुभ फल के सूचक माने गए हैं।

यह दोहा कार्य की व्यवस्था और उत्तम परिणाम — दोनों का आश्वासन देता है।

मूल दोहा: सुक्र सुमिरि गुरु सारदा गनपु लखनु हनुमान। करिय काजु सब साजु भल, निपटहिं नीक निदान॥६॥

शब्दार्थ:

  • सुक्र = दैत्यगुरु शुक्राचार्य
  • गुरु = गुरुदेव
  • सारदा = शारदा (सरस्वती देवी)
  • गनपु = गणपति (श्री गणेशजी)
  • लखनु = श्री लक्ष्मणजी
  • हनुमान = श्री हनुमानजी
  • साजु = व्यवस्था, तैयारी, साज-सज्जा
  • निपटहिं = अत्यंत, पूर्ण रूप से
  • निदान = परिणाम, अंतिम फल

करिय काजु सब साजु भल = कार्य करो, सारी व्यवस्था ठीक हो जाएगी। निपटहिं नीक निदान = परिणाम भी अत्यंत सुंदर होगा।

भावार्थ / व्याख्या:

गोस्वामी तुलसीदास जी यहाँ शुक्राचार्य, गुरुदेव, सरस्वती देवी, गणेशजी, लक्ष्मणजी और हनुमानजी — इन छह का स्मरण करके कार्य आरंभ करने को कहते हैं।

इस दोहे की विशेषता यह है कि इसमें दो अलग-अलग आश्वासन हैं। पहला — ‘सब साजु भल’, अर्थात् कार्य की सारी व्यवस्था और तैयारी ठीक बैठ जाएगी। दूसरा — ‘निपटहिं नीक निदान’, अर्थात् अंतिम परिणाम भी अत्यंत सुंदर होगा।

यह भेद महत्वपूर्ण है। कई बार व्यवस्था अच्छी होने पर भी परिणाम अच्छा नहीं होता, और कई बार परिणाम अच्छा होने पर भी रास्ता कष्टकर रहता है। यह दोहा दोनों के शुभ होने का संकेत देता है — मार्ग भी सुगम और मंज़िल भी उत्तम।

शकुन फल:

यह शकुन सभी प्रकार के कार्यों में सफलता का सूचक है। विशेषकर निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • आयोजन, समारोह या कार्यक्रम की तैयारी
  • व्यापार, ठेका या परियोजना का संचालन
  • निर्माण कार्य, गृह निर्माण या मरम्मत
  • टीम या साझेदारी में किया जाने वाला कार्य
  • किसी कार्य के परिणाम को लेकर संशय

इस दोहे के आने पर कार्य की व्यवस्था और परिणाम — दोनों के शुभ होने का संकेत मिलता है। बिना संशय के कार्य आरंभ करें, साधन स्वयं जुटते जाएँगे।

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