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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 3 — सरस्वती, गौरी, गुरु, गणपति, शंकर और मंगल के स्मरण से दैव अनुकूल होने और सब सिद्धियाँ मिलने का शकुन।

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शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। यह पहले सप्तक का तीसरा दोहा है। प्रथम सर्ग वंदना और मंगलाचरण से आरंभ होता है, इसलिए इसके अधिकांश दोहे शुभ फल के सूचक माने गए हैं।

यह दोहा सिद्धि-प्राप्ति और दैव की अनुकूलता का सूचक है।

मूल दोहा: गिरा गौरा गुरु नगप हर मंगल मंगल मूल। सुमिरि करतल सिद्धि सब, होइ ईस अनुकुल॥३॥

शब्दार्थ:

  • गिरा = वाणी की देवी (सरस्वती)
  • गौरा = गौरी (पार्वतीजी)
  • गुरु = गुरुदेव
  • नगप = गणपति (श्री गणेशजी)
  • हर = हर (शंकरजी)
  • मंगल = मंगल ग्रह, मंगल के देवता
  • करतल = हथेली में, हाथ में
  • सिद्धि = सफलता, सिद्धियाँ
  • ईस = ईश, दैव, भाग्य
  • अनुकुल = अनुकूल

सुमिरि करतल सिद्धि सब = स्मरण करने से सभी सिद्धियाँ हथेली में आ जाती हैं। होइ ईस अनुकुल = दैव अनुकूल हो जाता है।

भावार्थ / व्याख्या:

इस दोहे में तुलसीदास जी पाँच दिव्य शक्तियों और मंगल के दाता का स्मरण करने का निर्देश देते हैं — सरस्वतीजी, पार्वतीजी, गुरुदेव, गणेशजी, शंकरजी और मंगल।

इनके स्मरण से दो बड़े फल मिलते हैं। पहला, दैव अर्थात् भाग्य अनुकूल हो जाता है — वे परिस्थितियाँ जो हमारे नियंत्रण से बाहर हैं, वे भी हमारे पक्ष में आ जाती हैं। दूसरा, समस्त सिद्धियाँ हाथ में आ जाती हैं, अर्थात् जो भी कार्य हाथ में लिया जाए वह सिद्ध होता है।

यह दोहा बताता है कि प्रयत्न और भाग्य — दोनों का मेल ही सफलता है। भक्ति और स्मरण वह सेतु है जो पुरुषार्थ को दैव की कृपा से जोड़ देता है।

शकुन फल:

यह शकुन सभी प्रकार के कार्यों के लिए शुभ है। निम्नलिखित विषयों में सफलता की प्रबल संभावना है:

  • कोई भी नया कार्य या योजना आरंभ करना
  • रुका हुआ या अटका हुआ काम पूरा होना
  • साधना, मंत्र-जप या अनुष्ठान की सिद्धि
  • भाग्य या समय के अनुकूल होने संबंधी प्रश्न
  • प्रतियोगिता, परीक्षा या साक्षात्कार में सफलता

इस दोहे के आने पर सभी प्रकार के कार्यों में सफलता का संकेत मिलता है। समय अनुकूल है और प्रयत्न फलदायी होगा। कार्य आरंभ करने में विलंब न करें।

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