रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 4

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 4 — भरत, सरस्वती, शत्रुघ्न, गुरु, गणेश और बुध के स्मरण से विद्या, विनय और धर्म-फल की प्राप्ति का शकुन।

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इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। यह पहले सप्तक का चौथा दोहा है। प्रथम सर्ग वंदना और मंगलाचरण से आरंभ होता है, इसलिए इसके अधिकांश दोहे शुभ फल के सूचक माने गए हैं।

यह दोहा विद्या, धर्म-कार्य और शास्त्र-चर्चा से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देता है।

मूल दोहा: भरत भारती रिपु दवनु गुरु गनेस बुधवार। सुमिरत सुलभ सधर्म फल, बिद्या बिनय बिचार॥४॥

शब्दार्थ:

  • भरत = श्री भरतलाल
  • भारती = भारती (सरस्वती देवी)
  • रिपु दवनु = रिपुदमन (शत्रुघ्न कुमार)
  • गुरु = गुरुदेव
  • गनेस = श्री गणेशजी
  • बुधवार = बुधवार के देवता बुध
  • सधर्म फल = उत्तम धर्म का फल
  • बिनय = विनय, नम्रता
  • बिचार = विवेक, सद्बुद्धि

सुमिरत सुलभ सधर्म फल = स्मरण करने से उत्तम धर्म का फल सहज मिल जाता है। बिद्या बिनय बिचार = विद्या, विनय और विवेक सुलभ हो जाते हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

गोस्वामी तुलसीदास जी इस दोहे में भरतजी, सरस्वती देवी, शत्रुघ्न कुमार, गुरुदेव, गणेशजी और बुध — इन छह का स्मरण करने का उपदेश देते हैं।

इनके स्मरण से चार अनमोल फल सहज ही प्राप्त होते हैं — उत्तम धर्म का फल, विद्या, विनय और विचार। ध्यान देने योग्य है कि यहाँ केवल विद्या की बात नहीं है, बल्कि विनय और विवेक भी साथ माँगे गए हैं, क्योंकि विनय के बिना विद्या अहंकार बन जाती है और विवेक के बिना विद्या दिशाहीन हो जाती है।

बुध ग्रह बुद्धि, वाणी और शिक्षा के कारक हैं, तथा भरतजी धर्म और मर्यादा के आदर्श हैं। इसलिए यह दोहा विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों और धर्मकार्य में लगे साधकों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

शकुन फल:

यह शकुन विद्या और धर्म-कार्य से जुड़े प्रश्नों में विशेष शुभ है। निम्नलिखित विषयों में सफलता होगी:

  • अध्ययन, परीक्षा या शोध कार्य
  • धर्मकार्य, पूजा-पाठ या अनुष्ठान
  • शास्त्र-चर्चा, प्रवचन या लेखन
  • शिक्षण, प्रशिक्षण या ज्ञान-संबंधी व्यवसाय
  • विवाद या मतभेद का विवेकपूर्ण समाधान

इस दोहे के आने पर विद्या और धर्म से जुड़े कार्यों में निश्चित सफलता का संकेत मिलता है। बुधवार के दिन कार्य आरंभ करना और भी शुभ रहेगा।

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