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रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 6 श्लोक 7 — सीताजी का आम्र-वृक्ष लगाकर स्वयं सींचना; कृषि सफल और समय रमणीय होने का उत्तम शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। इस छठे सप्तक के सातवाँ दोहे में सप्तम सर्ग का वह भाव है जो कहता है — प्रश्न के अनुरूप आया दोहा ही सत्य उत्तर है।

सीताजी का आम्र-वृक्ष सींचना — कृषि सफल, समय रमणीय।

मूल दोहा: तुलसी लाइ रसाल तरु निज कर सींचति सीय। कृषी सफल भल सगुन सुभ, समउ कहब कमनीय॥७॥

शब्दार्थ:

  • लाइ = लगाकर
  • रसाल तरु = आम का वृक्ष
  • निज कर = अपने हाथों से
  • सींचति = सींचती हैं
  • सीय = सीताजी
  • कृषी सफल = खेती सफल
  • भल सगुन = उत्तम शकुन
  • समउ = समय
  • कमनीय = रमणीय, सुंदर

तुलसी लाइ रसाल तरु निज कर सींचति सीय = सीताजी आम का वृक्ष लगाकर अपने हाथों से सींचती हैं। कृषी सफल भल सगुन सुभ, समउ कहब कमनीय = खेती सफल होगी, समय रमणीय कहना चाहिए।

भावार्थ / व्याख्या:

तुलसीदास जी कहते हैं कि श्रीसीताजी आम का वृक्ष लगाकर उसे अपने हाथों से सींचती हैं। यह उत्तम शुभ शकुन है — खेती सफल होगी और यह समय रमणीय कहा जाना चाहिए।

यह दृश्य अत्यंत कोमल है। वनवास के कठिन दिनों में भी सीताजी वृक्ष लगा रही हैं और उन्हें सींच रही हैं। जो व्यक्ति विपत्ति में भी वृक्ष लगाता है, वह भविष्य में विश्वास रखता है।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा कृषि और सृजनात्मक कार्यों में सफलता का स्पष्ट सूचक है। ‘कमनीय’ अर्थात् रमणीय — यह समय सुंदर है, इसका पूरा उपयोग करें।

शकुन फल:

यह उत्तम शुभ शकुन है — कृषि सफल और समय रमणीय। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • खेती, बागवानी या पौधारोपण
  • कोई नया सृजनात्मक कार्य आरंभ करना
  • धैर्यपूर्वक की जा रही देखभाल का फल
  • भविष्य के लिए किया जा रहा निवेश
  • कठिन समय में भी आशा बनाए रखना

इस दोहे के आने पर कृषि सफल होगी और समय रमणीय है। जो बोया है उसकी देखभाल करते रहें — फल अवश्य मिलेगा।

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