रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 6 — अनेक ग्रहों का एक स्थान पर वक्र गति से होना और सूखा; राम-स्मरण का उपाय बताने वाला शकुन।
तुलसीदास जी की यह कृति प्रश्न और उत्तर की उस प्राचीन पद्धति को जीवित रखती है जिसमें रामकथा ही प्रमाण है। प्रस्तुत दोहा सप्तम सर्ग के दूसरे सप्तक में छठा स्थान पर है, जहाँ प्रश्न पूछने की सही रीति समझाई गई है।
ग्रहों का एक स्थान पर होना और वक्री गति — शासन का समय बदलेगा।
मूल दोहा: सात पाँच ग्रह एक थल, चलहिं बाम गति घाम। राज बिराजिय समउ गत, सुभ हित सुमिरहु राम॥६॥
शब्दार्थ:
- सात पाँच ग्रह = सात या पाँच ग्रह
- एक थल = एक ही स्थान पर
- चलहिं बाम गति = वक्र गति से चलें
- घाम = गर्मी, सूखा
- राज बिराजिय = शासन की स्थिति
- समउ गत = समय बीत जाएगा
- सुभ हित = शुभ के लिए
- सुमिरहु राम = श्रीराम का स्मरण करो
सात पाँच ग्रह एक थल, चलहिं बाम गति घाम = सात या पाँच ग्रह एक स्थान पर हों और वक्र गति से चलें तो सूखा पड़ता है। सुभ हित सुमिरहु राम = शुभ के लिए श्रीराम का स्मरण करो।
भावार्थ / व्याख्या:
जब सात या पाँच ग्रह एक ही स्थान पर एकत्र हो जाएँ और वक्र गति से चलने लगें, तब घाम अर्थात् अत्यधिक गर्मी और सूखे की स्थिति बनती है।
ऐसे समय में शासन की स्थिति डगमगाती है और वह काल बीत जाता है। तुलसीदास जी उपाय भी बताते हैं — शुभ के लिए श्रीराम का स्मरण करो।
ज्योतिष में अनेक ग्रहों का एक राशि में एकत्र होना असाधारण योग माना जाता है, जिसका प्रभाव व्यापक होता है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में चेतावनी देता है जहाँ मौसम, फसल या शासन-व्यवस्था विषय हो। परंतु इसमें समाधान भी है — राम-स्मरण।
शकुन फल:
यह शकुन असाधारण ग्रह-योग और परिवर्तन का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- मौसम, सूखा या फसल से जुड़ा प्रश्न
- शासन या नेतृत्व में आने वाला परिवर्तन
- ग्रह-दशा या ज्योतिषीय योग
- व्यापक स्तर पर होने वाला बदलाव
- कठिन काल के बीतने की प्रतीक्षा
इस दोहे के आने पर कठिन ग्रह-योग का संकेत है, परंतु यह समय बीत जाएगा। शुभ के लिए श्रीराम का स्मरण करते रहें — यही उपाय बताया गया है।
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