रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 5 — देवता, मुनि, चौदहों भुवन और अयोध्या के घर-घर में हर्ष; शुभ प्रश्न-फल।
जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। प्रस्तुत दोहा षष्ठम सर्ग के दूसरे सप्तक में पाँचवाँ स्थान पर है, जहाँ पुनर्मिलन और कुशल-क्षेम के शुभ संकेत मिलते हैं।
चौदहों भुवन में हर्ष — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: अमर अनंदित मुनि मुदित मुदित भुवन दस चारि। घर घर अवध बधावने मुदित नगर नर नारि॥५॥
शब्दार्थ:
- अमर = देवता
- अनंदित = आनंदमग्न
- मुनि मुदित = मुनिगण प्रसन्न
- भुवन दस चारि = चौदहों भुवन
- घर घर = हर घर में
- बधावने = बधाई के बाजे
- नगर नर नारि = नगर के स्त्री-पुरुष
अमर अनंदित, मुनि मुदित, मुदित भुवन दस चारि = देवता आनंदमग्न, मुनि प्रसन्न, चौदहों भुवन हर्षित। घर घर अवध बधावने = अयोध्या के घर-घर बधाई बज रही है।
भावार्थ / व्याख्या:
देवता आनंदमग्न हैं, मुनिगण प्रसन्न हैं, चौदहों भुवन हर्ष से भरे हैं। अयोध्या के घर-घर में बधाई बज रही है और नगर के स्त्री-पुरुष सब प्रसन्न हैं।
‘भुवन दस चारि’ अर्थात् चौदह लोक — यह सृष्टि की समग्रता का सूचक है। अर्थात् प्रसन्नता किसी एक स्थान तक सीमित नहीं, सर्वत्र व्याप्त है।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को शुभ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ किसी ऐसी सफलता या शुभ अवसर की बात हो जिससे बहुत से लोग प्रसन्न हों। यह व्यापक और सार्वजनिक शुभता का संकेत है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है और व्यापक प्रसन्नता का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- ऐसी सफलता जिससे बहुत लोग प्रसन्न हों
- सार्वजनिक उत्सव या समारोह
- परिवार, समाज और सर्वत्र शुभता
- किसी शुभ समाचार का व्यापक स्वागत
- सामूहिक कल्याण से जुड़ा कार्य
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। प्रसन्नता व्यापक होगी — आपके साथ बहुत से लोग खुश होंगे।
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