रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 1 — हनुमानजी द्वारा माया-मलिन सिंहिका का वध; मार्ग में कपटी और धूर्त मिलने की चेतावनी।
इस ग्रंथ में उत्तर सीधा नहीं, प्रसंग के माध्यम से मिलता है — जो प्रसंग सामने आए, उसी का भाव प्रश्न का फल बन जाता है। प्रस्तुत दोहा पंचम सर्ग के दूसरे सप्तक में पहला स्थान पर है, जहाँ साहस, संदेश और यात्रा से जुड़े प्रश्नों का उत्तर मिलता है।
सिंहिका-वध — मार्ग में कपटी और धूर्त मिलेंगे, सावधान रहें।
मूल दोहा: राहु मातु माया मलिन मारी मरुत पूत। समय सगुन मारग मिलहिं, छल मलीन खल धूत॥१॥
शब्दार्थ:
- राहु मातु = राहु की माता (सिंहिका)
- माया = माया करने वाली
- मलिन = कपट से भरी
- मारी = मार दी
- मरुत पूत = पवनपुत्र (हनुमानजी)
- समय = यात्रा के समय
- मारग = मार्ग में
- छल मलीन = कपटी और मलिन
- खल धूत = दुष्ट और धूर्त
माया मलिन मारी मरुत पूत = कपट से भरी सिंहिका को पवनपुत्र ने मार दिया। छल मलीन खल धूत = मार्ग में कपटी, पापी, दुष्ट और धूर्त मिलेंगे।
भावार्थ / व्याख्या:
माया करने वाली, कपट से भरी राहु की माता सिंहिका को श्रीपवनकुमार ने मार दिया। सिंहिका छाया पकड़कर प्राणी को खींच लेती थी — अर्थात् वह प्रत्यक्ष नहीं, छिपकर आक्रमण करती थी।
तुलसीदास जी इसका शकुन-फल बताते हैं — यात्रा के समय मार्ग में कपटी, पापी, दुष्ट और धूर्त लोग मिलेंगे, इसलिए सावधान रहना चाहिए।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा मिश्रित है। एक ओर चेतावनी है कि छल करने वाले मिलेंगे, दूसरी ओर आश्वासन भी कि हनुमानजी की तरह उनसे निपटा जा सकता है। सतर्कता ही इसका मूल संदेश है।
शकुन फल:
यह शकुन मार्ग में कपटी और धूर्त लोगों की चेतावनी देता है। निम्नलिखित प्रश्नों में सतर्कता:
- यात्रा में मिलने वाले अनजान लोग
- छिपकर किया जाने वाला षड्यंत्र या धोखा
- किसी की मीठी बातों में छिपा स्वार्थ
- नई साझेदारी या अनुबंध में छिपी शर्तें
- पीठ पीछे की जाने वाली बुराई
इस दोहे के आने पर मार्ग में कपटी लोग मिलने की चेतावनी है। सतर्क रहें, अनजान पर तुरंत विश्वास न करें। परंतु डरें नहीं — ऐसी बाधाओं से निपटा जा सकता है।
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