रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 5 श्लोक 6 — धनुष-बाण धारी श्यामल-गौर किशोरों की मार्ग में शोभा; मूर्तिमान मंगल का उत्तम प्रश्न-फल।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। चतुर्थ सर्ग के पाँचवें सप्तक का छठा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें उत्सव, विवाह और मंगल-कार्य के शकुन देखे जाते हैं।
श्यामल-गौर किशोरों की शोभा — प्रश्न-फल उत्तम है।
मूल दोहा: स्यामल गौर किसोर बर धरें तुन धनु बान। सोहत कौसिक सहित मग मुद मंगल कल्यान॥६॥
शब्दार्थ:
- स्यामल = साँवले (श्रीराम)
- गौर = गोरे (लक्ष्मणजी)
- किसोर बर = श्रेष्ठ किशोर
- धरें = धारण किए
- तुन = तरकस
- धनु बान = धनुष-बाण
- सोहत = सुशोभित हैं
- मग = मार्ग में
- मुद मंगल कल्यान = मानो मूर्तिमान आनंद, मंगल और कल्याण
स्यामल गौर किसोर बर धरें तुन धनु बान = साँवले और गोरे श्रेष्ठ किशोर तरकस और धनुष-बाण लिए। मुद मंगल कल्यान = मानो मूर्तिमान आनंद, मंगल और कल्याण हों।
भावार्थ / व्याख्या:
साँवले और गोरे श्रेष्ठ किशोर दोनों भाई तरकस और धनुष-बाण लिए विश्वामित्रजी के साथ मार्ग में ऐसे सुशोभित हैं, मानो मूर्तिमान आनंद, मंगल और कल्याण चल रहे हों।
यह चित्र रामकथा के सबसे मनोहर दृश्यों में से एक है — दो किशोर, हाथ में धनुष-बाण, एक ऋषि के साथ, अपने पहले अभियान पर।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘उत्तम’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ युवाओं का कोई कार्य, नए अभियान की शुरुआत या दो लोगों का साथ मिलकर आगे बढ़ना विषय हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल उत्तम है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- युवाओं का कोई कार्य या पहला अभियान
- दो व्यक्तियों का साथ मिलकर काम करना
- किसी अनुभवी के मार्गदर्शन में यात्रा
- सुरक्षा और तैयारी के साथ प्रस्थान
- नया कार्यक्षेत्र या नई भूमिका
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है। तैयारी के साथ निकलें — मार्ग स्वयं मंगलमय होगा और साथी भी अनुकूल मिलेंगे।
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