रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 6 श्लोक 4 — हनुमानजी का श्रीराम को प्रणाम और प्रभु का आदरपूर्वक बुलाना; शुभ प्रश्न-फल।
सात सर्ग, प्रत्येक सर्ग में सात सप्तक और प्रत्येक सप्तक में सात दोहे — यही ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की सरल किंतु सुगठित संरचना है। इस छठे सप्तक के चौथा दोहे में तृतीय सर्ग का वह भाव है जहाँ मार्ग कठिन होने पर भी सहायक मिल ही जाते हैं।
हनुमानजी का प्रणाम और प्रभु का आदरपूर्वक बुलाना — प्रश्न-फल शुभ।
मूल दोहा: हनुमान हियँ हरषि तब राम जोहारे जाइ। मंगल मूरति मारुतिहि सादर लीन्ह बुलाइ॥४॥
शब्दार्थ:
- हियँ हरषि = हृदय में प्रसन्न होकर
- जोहारे = प्रणाम किया
- मंगल मूरति = मंगल की मूर्ति
- मारुतिहि = हनुमानजी को
- सादर = आदरपूर्वक
- लीन्ह बुलाइ = बुला लिया
हनुमान हियँ हरषि तब राम जोहारे जाइ = प्रसन्न होकर हनुमानजी ने जाकर श्रीराम को प्रणाम किया। सादर लीन्ह बुलाइ = प्रभु ने आदरपूर्वक पास बुला लिया।
भावार्थ / व्याख्या:
तब चित्त में प्रसन्न होकर सम्मुख जाकर हनुमानजी ने श्रीराम को प्रणाम किया। मंगलमूर्ति प्रभु ने श्रीहनुमानजी को आदरपूर्वक अपने पास बुला लिया।
इस दोहे की विशेषता ‘सादर’ शब्द में है। श्रीराम ने केवल स्वीकार नहीं किया, बल्कि आदर के साथ पास बुलाया। स्वामी का सेवक के प्रति ऐसा आदर दुर्लभ है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ है। यह उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ किसी बड़े व्यक्ति से मिलना, अपनी बात रखना या स्वीकृति पाना विषय हो। संदेश यह है कि आपको न केवल स्वीकार किया जाएगा, बल्कि सम्मान भी मिलेगा।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- किसी बड़े या वरिष्ठ व्यक्ति से भेंट
- अपनी बात या प्रस्ताव रखने का अवसर
- नौकरी का साक्षात्कार या चयन
- किसी संस्था या समूह में स्वीकृति
- सम्मान और मान्यता से जुड़ा प्रश्न
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। आपको न केवल स्वीकार किया जाएगा, बल्कि आदर भी मिलेगा। विनम्रता के साथ आगे बढ़ें।
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