रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 1 श्लोक 5 — कौवों की कठोर ध्वनि, सियारों का रोना और मद में मतवाली राक्षस-सेना; अनिष्ट सूचक शकुन।
तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। यह पहले सप्तक का पाँचवाँ दोहा है। तृतीय सर्ग में शूर्पणखा, खर-दूषण और सीता-हरण जैसे प्रसंग आते हैं, इसलिए इसके कई दोहे अपशकुन सूचक हैं।
कौवों और सियारों के अपशकुन — यह शकुन अनिष्ट सूचक है।
मूल दोहा: कटु कुठायँ करटा रटहिं, केंकरहिं फेरु कुभाँति। नीच निसाचर मीच बस अनी मोह मद माति॥५॥
शब्दार्थ:
- कटु = कठोर
- कुठायँ = बुरे स्थानों में
- करटा = कौवे
- रटहिं = बार-बार बोलते हैं
- केंकरहिं = रोते हैं, चीखते हैं
- फेरु = सियार
- कुभाँति = बुरी तरह
- मीच बस = मृत्यु के वश
- अनी = सेना
- मोह मद माति = मोह और गर्व से मतवाली
कटु कुठायँ करटा रटहिं = कौवे बुरे स्थानों पर कठोर ध्वनि करते हैं। अनी मोह मद माति = सेना मोह और गर्व से मतवाली है।
भावार्थ / व्याख्या:
कौवे बुरे स्थानों में बैठे बार-बार कठोर ध्वनि कर रहे हैं, सियार बुरी तरह रो रहे हैं, और नीच राक्षसों की सेना मृत्यु के वश होकर मोह तथा गर्व से मतवाली हो रही है।
इस दोहे में प्रकृति की चेतावनी और मनुष्य की अनसुनी — दोनों दिखाई देते हैं। अपशकुन साफ़ हो रहे थे, पर सेना गर्व में इतनी डूबी थी कि उसने देखा ही नहीं।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा अनिष्ट सूचक है। इसका विशेष संदेश यह है कि इस समय अहंकार और अति-आत्मविश्वास सबसे बड़ा शत्रु है। चेतावनी के संकेत मिल रहे हैं — उन्हें अनदेखा न करें।
शकुन फल:
यह शकुन अनिष्ट सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सावधानी:
- अति-आत्मविश्वास या अहंकार से लिया जा रहा निर्णय
- चेतावनी के संकेत जिन्हें अनदेखा किया जा रहा हो
- समूह या भीड़ के दबाव में लिया गया निर्णय
- युद्ध, टकराव या बड़ी प्रतिस्पर्धा
- बिना पूरी तैयारी के उठाया जा रहा बड़ा कदम
इस दोहे के आने पर शकुन अनिष्ट सूचक है। जो चेतावनियाँ मिल रही हैं उन्हें गंभीरता से लें। अहंकार त्यागें और निर्णय पर पुनर्विचार करें।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।