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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 3 — भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण सहित रघुनाथजी के स्मरण से उत्तम संयोग और कल्याणकारी साथी मिलने का शकुन।

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शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। प्रथम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह तीसरा दोहा शुभारंभ, यात्रा और धर्म-कार्य से जुड़े प्रश्नों में विशेष रूप से देखा जाता है।

यह दोहा अच्छे साथी और अनुकूल संयोग मिलने का संकेत देता है।

मूल दोहा: भरत सत्रुसूदन लखन सहित सुमिरि रघुनाथ। करहु काज सुभ साज सब, मिलहिं सुमंगल साथ॥३॥

शब्दार्थ:

  • सत्रुसूदन = शत्रुओं का नाश करने वाले (शत्रुघ्नजी)
  • लखन = श्री लक्ष्मणजी
  • सहित = के साथ
  • रघुनाथ = श्रीराम
  • साज = संयोग, व्यवस्था
  • मिलहिं = मिलेंगे
  • सुमंगल साथ = कल्याणकारी साथी

करहु काज सुभ साज सब = कार्य करो, सभी संयोग उत्तम मिलेंगे। मिलहिं सुमंगल साथ = कल्याणकारी साथी प्राप्त होंगे।

भावार्थ / व्याख्या:

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि श्रीभरतजी, शत्रुघ्न कुमार और लक्ष्मणजी के साथ श्रीरघुनाथजी का स्मरण करके काम आरंभ करो।

इससे दो फल मिलेंगे — पहला, सभी संयोग उत्तम मिलेंगे, अर्थात् परिस्थितियाँ अपने आप अनुकूल बनती जाएँगी। दूसरा, कल्याणकारी साथी प्राप्त होंगे।

दूसरा फल विशेष महत्वपूर्ण है। जीवन में सही साथी मिल जाना आधी सफलता है, और गलत साथी मिल जाना आधी असफलता। यह दोहा आश्वासन देता है कि इस कार्य में जो लोग साथ आएँगे, वे आपके हित के लिए होंगे। इसीलिए यह दोहा साझेदारी और सहयोग से जुड़े प्रश्नों में सर्वाधिक शुभ है।

शकुन फल:

यह शकुन उत्तम संयोग और अच्छे साथी मिलने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में शुभ:

  • साझेदारी या भागीदारी में व्यवसाय
  • नई टीम, कर्मचारी या सहयोगी का चयन
  • विवाह या जीवनसाथी संबंधी प्रश्न
  • किसी संस्था या समूह से जुड़ने का निर्णय
  • सहायता या समर्थन मिलने की संभावना

इस दोहे के आने पर उत्तम संयोग और भरोसेमंद साथी मिलने का संकेत है। साझेदारी या सामूहिक कार्य में आगे बढ़ना शुभ रहेगा।

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