रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 1 — राजभवन में श्रीराम की बालक्रीड़ा का स्मरण; पद-पद पर मंगल और आनंद का शुभ शकुन।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। प्रथम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह पहला दोहा शुभारंभ, यात्रा और धर्म-कार्य से जुड़े प्रश्नों में विशेष रूप से देखा जाता है।
यह सप्तक श्रीराम की बाल-लीलाओं और संस्कारों से आरंभ होता है।
मूल दोहा: भूप भवन भाइन्ह सहित रघुबर बाल बिनोद। सुमिरत सब कल्यान जग, पग पग मंगल मोद॥१॥
शब्दार्थ:
- भूप भवन = राजा का भवन, राजमहल
- भाइन्ह सहित = भाइयों के साथ
- रघुबर = रघुकुल श्रेष्ठ (श्रीराम)
- बाल बिनोद = बालक्रीड़ा, बचपन की लीलाएँ
- सुमिरत = स्मरण करने से
- पग पग = पद-पद पर, हर कदम पर
- मोद = आनंद
रघुबर बाल बिनोद = श्रीराम की बालक्रीड़ा। पग पग मंगल मोद = हर कदम पर मंगल और आनंद होता है।
भावार्थ / व्याख्या:
महाराज दशरथ के राजभवन में श्रीराम अपने भाइयों के साथ बालक्रीड़ा कर रहे हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि इस दृश्य का स्मरण करने से संसार में सब प्रकार का कल्याण होता है।
‘पग पग मंगल मोद’ अत्यंत सुंदर पद है। इसका अर्थ है कि मंगल एक बार नहीं, हर कदम पर मिलेगा — जीवन के हर मोड़ पर, हर छोटे-बड़े कार्य में।
बाल-लीला का स्मरण मन को निर्मल और निश्छल बनाता है। जिस प्रकार बालक के मन में छल-कपट नहीं होता, उसी प्रकार जो साधक इस स्मरण से अपना मन शुद्ध कर लेता है, उसके जीवन में स्वाभाविक रूप से मंगल आने लगता है।
शकुन फल:
यह शकुन शुभ है और निरंतर मंगल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- घर-परिवार और गृहस्थ जीवन से जुड़े प्रश्न
- बच्चों की परवरिश, शिक्षा या स्वास्थ्य
- नए घर या संपत्ति संबंधी निर्णय
- दैनिक जीवन के छोटे-बड़े सभी कार्य
- मन की शांति और घरेलू सुख
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। हर कदम पर मंगल का संकेत मिलता है — कार्य निर्विघ्न आगे बढ़ेगा और घर में आनंद का वातावरण रहेगा।
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