रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं
ब्राउजिंग टैग

Bal Kand

कवि वंदना

चरन कमल बंदउँ तिन्ह केरे। पुरवहुँ सकल मनोरथ मेरे॥ कलि के कबिन्ह करउँ परनामा। जिन्ह बरने रघुपति गुन ग्रामा॥2॥ मैं…

संत-असंत वंदना

बंदउँ संत असज्जन चरना। दुःखप्रद उभय बीच कछु बरना॥ बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं॥2॥ अब मैं…

खल वंदना

चौपाई : बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ॥ पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद…

ब्राह्मण-संत वंदना

 बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥ सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥2॥ पहले पृथ्वी…

गुरु वंदना

गुरु वंदना बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि। महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर॥5॥ मैं उन गुरु महाराज के…

मंगलाचरण

श्लोक: वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥ अक्षरों, अर्थ समूहों,…

बालकाण्ड

बालकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का प्रथम भाग (काण्ड या सोपान) है। …