रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं
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Bal Kand

मानस का रूपक और माहात्म्य

दोहा : जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु। अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु॥35॥ यह रामचरित…

मानस निर्माण की तिथि

सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा॥ संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा॥2॥ अब मैं…

श्री नाम वंदना और नाम महिमा

चौपाई : बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥ बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥1॥…