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शिवजी की विचित्र बारात और विवाह की तैयारी
॥ श्री रामचरितमानस ॥

शिवजी की विचित्र बारात और विवाह की तैयारी

दोहा : लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान। होहिं सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान॥91॥ सब देवता अपने भाँति-भाँति

॥ श्री रामचरितमानस ॥

देवताओं का शिवजी से ब्याह के लिए प्रार्थना करना, सप्तर्षियों का पार्वती के पास जाना

दोहा : सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु। निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु॥88॥ हे शंकर! सब

सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वतीजी का महत्व
॥ श्री रामचरितमानस ॥

सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वतीजी का महत्व

चौपाई : रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी॥ बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी॥1॥ ऋषियों

पति के अपमान से दुःखी होकर सती का योगाग्नि से जल जाना, दक्ष यज्ञ विध्वंस
॥ श्री रामचरितमानस ॥

पति के अपमान से दुःखी होकर सती का योगाग्नि से जल जाना, दक्ष यज्ञ विध्वंस

दोहा : सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध। सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध॥63॥ परन्तु

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