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श्री भगवान्‌ का प्राकट्य और बाललीला का आनंद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री भगवान्‌ का प्राकट्य और बाललीला का आनंद

दोहा : जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल। चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल॥190॥ योग, लग्न, ग्रह, […]

राजा दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियों का गर्भवती होना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

राजा दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियों का गर्भवती होना

गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी॥ यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो

पृथ्वी और देवतादि की करुण पुकार
॥ श्री रामचरितमानस ॥

पृथ्वी और देवतादि की करुण पुकार

चौपाई :: बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा॥ मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा॥1॥

रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार

दोहा : भरद्वाज सुनु जाहि जब होई बिधाता बाम। धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम॥175॥ (याज्ञवल्क्यजी कहते हैं-) हे

विश्वमोहिनी का स्वयंवर, शिवगणों को तथा भगवान्‌ को शाप और नारद का मोहभंग
॥ श्री रामचरितमानस ॥

विश्वमोहिनी का स्वयंवर, शिवगणों को तथा भगवान्‌ को शाप और नारद का मोहभंग

दोहा : आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि। कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि॥130॥ (फिर) राजा ने राजकुमारी

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