श्री सीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश Apr 9, 2021 2,355 0 दोहा : जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाइ। चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं िलवाइ॥246॥ तब सुअवसर जानकर…
श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश Apr 9, 2021 3,794 0 चौपाई : सीय स्वयंबरू देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई॥ लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई॥1॥ चलकर…
श्री सीताजी का पार्वती पूजन एवं वरदान प्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण संवाद Apr 9, 2021 4,628 0 दोहा : देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि। निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि॥234॥ मृग, पक्षी और…
पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजी का प्रथम दर्शन, श्री सीता-रामजी का परस्पर दर्शन Apr 9, 2021 3,984 0 दोहा : उठे लखनु निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान। गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान॥226॥ रात बीतने पर,…
श्री राम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण Apr 9, 2021 2,806 0 दोहा : जाइ देखि आवहु नगरु सुख निधान दोउ भाइ। करहु सुफल सब के नयन सुंदर बदन देखाइ॥218॥ सुख के निधान दोनों भाई…
श्री राम-लक्ष्मण को देखकर जनकजी की प्रेम मुग्धता Apr 9, 2021 2,864 0 दोहा : प्रेम मगन मनु जानि नृपु करि बिबेकु धरि धीर। बोलेउ मुनि पद नाइ सिरु गदगद गिरा गभीर॥215॥ मन को प्रेम में…
श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश Apr 9, 2021 3,703 0 चौपाई :: चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा॥ गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि आई॥1॥…
अहल्या उद्धार Apr 9, 2021 2,649 0 आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं॥ पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी॥6॥ मार्ग…
विश्वामित्र-यज्ञ की रक्षा Apr 9, 2021 2,761 0 दोहा : आयुध सर्ब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि। कंद मूल फल भोजन दीन्ह भगति हित जानि॥209॥ सब अस्त्र-शस्त्र…
विश्वामित्र का राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को माँगना, ताड़का वध Apr 9, 2021 4,168 0 दोहा : ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप। भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप॥205॥ जो व्यापक, अकल (निरवयव),…