रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 3 — राहु-केतु की वक्र गति और पाखंड-प्रियता; अशुभ और अमंगल की जड़ बताने वाला शकुन।

4

शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। प्रस्तुत दोहा सप्तम सर्ग के दूसरे सप्तक में तीसरा स्थान पर है, जहाँ प्रश्न पूछने की सही रीति समझाई गई है।

राहु-केतु की वक्र गति — अशुभ और अमंगल की जड़।

मूल दोहा: राहु केतु उलटे चलहिं, असुभ अमंगल मूल। रुंड मुंड पाषंड प्रिय, असुर अमर प्रतिकूल॥३॥

शब्दार्थ:

  • राहु केतु = राहु और केतु
  • उलटे चलहिं = वक्र गति से चलते हैं
  • असुभ = अशुभ
  • अमंगल मूल = अमंगल की जड़
  • रुंड मुंड = धड़ और सिर
  • पाषंड प्रिय = पाखंड के प्रिय
  • असुर = राक्षस
  • अमर = देवता
  • प्रतिकूल = विपरीत

राहु केतु उलटे चलहिं, असुभ अमंगल मूल = राहु-केतु वक्र गति से चलते हैं, ये अशुभ और अमंगल की जड़ हैं। असुर अमर प्रतिकूल = ये असुरों और देवताओं दोनों के प्रतिकूल हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

राहु और केतु सदा वक्र अर्थात् उलटी गति से चलते हैं — ये अशुभ और अमंगल की जड़ हैं। ये रुंड-मुंड अर्थात् धड़ और सिर मात्र हैं, पाखंड के प्रिय हैं तथा असुरों और देवताओं — दोनों के प्रतिकूल हैं।

पुराणों के अनुसार समुद्र-मंथन के समय स्वरभानु नामक असुर ने छल से अमृत पी लिया था, जिस पर भगवान विष्णु ने उसका सिर काट दिया। सिर राहु और धड़ केतु बन गया — इसीलिए इन्हें ‘रुंड मुंड’ कहा गया है।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा स्पष्ट चेतावनी देता है। जब राहु-केतु प्रबल हों, तो छल, भ्रम और पाखंड बढ़ता है और कोई भी पक्ष सुरक्षित नहीं रहता। ऐसे समय में कोई भी नया कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए।

शकुन फल:

यह शकुन अशुभ और अमंगल की जड़ है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सतर्कता:

  • उलटी दिशा में जा रही कोई स्थिति
  • छल, भ्रम या पाखंड की आशंका
  • ऐसा विवाद जिसमें कोई पक्ष सुरक्षित न हो
  • राहु-केतु दशा या ग्रह-दोष से जुड़ा प्रश्न
  • कोई भी नया कार्य या निर्णय

इस दोहे के आने पर स्थिति अशुभ है। कोई नया कार्य आरंभ न करें, छल-भ्रम से सावधान रहें और किसी भी पक्ष पर आँख मूँदकर विश्वास न करें।

आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करें

हर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है।

सहयोग करें

टिप्पणियाँ बंद हैं।