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रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 3 — लव-कुश का जन्म; पुत्र-प्राप्ति और मंगल-कुशल समाचार का सुहावना शकुन।

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शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। षष्ठम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें तीसरा दोहा — इस सर्ग के शकुन निर्मल विचार और सत्य आचरण का फल बताते हैं।

लव-कुश का जन्म — पुत्र-प्राप्ति और सुखद समाचार का शकुन।

मूल दोहा: पुत्र लाभ लवकुस जनम सगुन सुहावन होइ। समाचार मंगल कुसल सुखद सुनावइ कोइ॥३॥

शब्दार्थ:

  • पुत्र लाभ = पुत्र की प्राप्ति
  • लवकुस जनम = लव-कुश का जन्म
  • सगुन सुहावन = सुहावना शकुन
  • होइ = होगा
  • समाचार = समाचार
  • मंगल कुसल = मंगल और कुशल
  • सुखद = सुखदायी
  • सुनावइ कोइ = कोई सुनाएगा

पुत्र लाभ लवकुस जनम सगुन सुहावन होइ = लव-कुश का जन्म पुत्र-प्राप्ति का सुहावना शकुन है। समाचार मंगल कुसल सुखद सुनावइ कोइ = कोई मंगल-कुशल का सुखद समाचार सुनाएगा।

भावार्थ / व्याख्या:

लव-कुश का जन्म पुत्र-प्राप्ति का सूचक शुभ शकुन है। तुलसीदास जी कहते हैं कि कोई आनंद-मंगल का सुखदायी समाचार सुनाएगा।

यह अंधकार में आशा की किरण है। सीताजी वन में अकेली थीं, वियोग में थीं, फिर भी वहीं दो पुत्रों का जन्म हुआ।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा दो बातें बताता है — पुत्र-प्राप्ति और सुखद समाचार का आगमन। यह उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ कठिन परिस्थिति के बीच किसी शुभ समाचार की प्रतीक्षा हो।

शकुन फल:

यह शकुन पुत्र-प्राप्ति और सुखद समाचार का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • संतान प्राप्ति, विशेषकर पुत्र-लाभ
  • कठिन परिस्थिति में मिलने वाला शुभ समाचार
  • किसी की कुशलता की सूचना
  • अकेलेपन या वियोग के बीच नई आशा
  • परिवार में नए सदस्य का आगमन

इस दोहे के आने पर पुत्र-प्राप्ति और सुखद समाचार का संकेत है। कठिन समय के बीच भी शुभ समाचार आएगा।

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