रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 6 श्लोक 3 — यति-श्वान संवाद और अयोध्या में दूध-पानी का पृथक होना; विवाद में सत्य की विजय का शकुन।
शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। इस छठे सप्तक के तीसरा दोहे में षष्ठम सर्ग का वह भाव है जहाँ हर्ष के साथ-साथ वियोग की छाया भी दिखाई देती है।
दूध-पानी का पृथक होना — विवाद में सत्य की विजय होगी।
मूल दोहा: जती स्वान संबाद सुनि सगुन कहब जियँ जानि। हंस बंस अवतंस पुर बिलग होत पय पानि॥३॥
शब्दार्थ:
- जती = यति, संन्यासी
- स्वान = कुत्ता
- संबाद = संवाद
- सुनि = सुनकर
- जियँ जानि = चित्त में समझकर
- हंस बंस अवतंस = सूर्यवंश विभूषण
- पुर = नगर में
- बिलग होत = पृथक होता है
- पय पानि = दूध और पानी
जती स्वान संबाद सुनि सगुन कहब जियँ जानि = यति और कुत्ते का संवाद सुनकर शकुन बताऊँगा। बिलग होत पय पानि = वहाँ दूध और पानी पृथक होता है।
भावार्थ / व्याख्या:
यति संन्यासी और कुत्ते का संवाद सुनकर अपने चित्त में समझकर तुलसीदास जी शकुन बताते हैं कि सूर्यवंश विभूषण श्रीरघुनाथजी के नगर अयोध्या में दूध और पानी पृथक होता है, अर्थात् सच्चा न्याय प्राप्त होता है।
दूध-पानी का अलग होना हंस की विशेषता है — नीर-क्षीर विवेक। यह सच्चे न्याय का प्रतीक है, जहाँ सत्य और असत्य अलग-अलग पहचान लिए जाते हैं।
तुलसीदास जी इसका शकुन-फल स्पष्ट बताते हैं — विवाद में सत्य की विजय होगी। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नकर्ताओं के लिए अत्यंत आश्वस्तकारी है जो सही पक्ष पर हैं परंतु उन्हें सुना नहीं जा रहा।
शकुन फल:
यह शकुन विवाद में सत्य की विजय का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- मुकदमा या विवाद जिसमें आपका पक्ष सही हो
- झूठे आरोप या गलतफहमी का निवारण
- सत्य के सामने आने की प्रतीक्षा
- किसी जाँच या पड़ताल का परिणाम
- निष्पक्ष न्याय की आशा
इस दोहे के आने पर विवाद में सत्य की विजय होगी। यदि आपका पक्ष सही है तो चिंता न करें — दूध और पानी अलग हो जाएँगे।
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