रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 2 — रामराज्य में अकाल मृत्यु पर श्रीराम और मंत्रियों की चिंता; यह प्रश्न-फल निकृष्ट है।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। षष्ठम सर्ग के पाँचवें सप्तक का दूसरा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राज्य, यश और गृहस्थ-सुख के शकुन देखे जाते हैं।
अकाल मृत्यु पर चिंता — यह प्रश्न-फल निकृष्ट है।
मूल दोहा: राम सोच संकोच बस सचिव बिकल संताप। बालक मीचु अकाल भइ राम राज केहि पाप॥२॥
शब्दार्थ:
- सोच = चिंता
- संकोच बस = संकोच के कारण
- सचिव = मंत्री
- बिकल = व्याकुल
- संताप = दुःख
- मीचु अकाल = असमय मृत्यु
- भइ = हुई
- केहि पाप = किसके पाप से
राम सोच संकोच बस, सचिव बिकल संताप = श्रीराम चिंता में पड़ गए, मंत्री दुःख से व्याकुल हो गए। बालक मीचु अकाल भइ राम राज केहि पाप = रामराज्य में किसके पाप से बालक की असमय मृत्यु हुई।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीरामजी संकोच के कारण चिंता में पड़ गए और मंत्री दुःख से व्याकुल हो गए कि श्रीराम के राज्य में किसके पाप से बालक की असमय मृत्यु हुई।
ध्यान देने योग्य है कि श्रीराम ने दोष किसी और पर नहीं डाला — उन्होंने पहले स्वयं और अपने शासन पर प्रश्न उठाया। यही उत्तरदायी नेतृत्व का लक्षण है।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘निकृष्ट’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में चेतावनी देता है जहाँ कोई अप्रत्याशित दुर्घटना या हानि हो और उसका कारण स्पष्ट न हो। ऐसे समय में दोषारोपण के बजाय कारण खोजना आवश्यक है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल निकृष्ट है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सतर्कता:
- अप्रत्याशित दुर्घटना या अकाल हानि
- जिस समस्या का कारण स्पष्ट न हो
- किसी के अनुचित आचरण से आया संकट
- नेतृत्व या ज़िम्मेदारी पर उठने वाला प्रश्न
- आत्म-निरीक्षण की आवश्यकता वाली स्थिति
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल निकृष्ट है। दोषारोपण के बजाय मूल कारण खोजें। जाँच में देर न करें — समाधान कारण जानने के बाद ही मिलेगा।
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