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रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 1

रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 1 — ब्राह्मण दंपति का मृत बालक लेकर राजद्वार पर विलाप; यह प्रश्न-फल अशुभ है।

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गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। षष्ठम सर्ग के पाँचवें सप्तक का पहला दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राज्य, यश और गृहस्थ-सुख के शकुन देखे जाते हैं।

ब्राह्मण का मृत बालक — यह प्रश्न-फल अशुभ है।

मूल दोहा: बिप्र एक बालक मृतक राखेउ राम दुआर। दंपति बिलपत सोक अति आरत करत पुकार॥१॥

शब्दार्थ:

  • बिप्र = ब्राह्मण
  • बालक मृतक = मरा हुआ बालक
  • राखेउ = रख दिया
  • राम दुआर = श्रीराम के द्वार पर
  • दंपति = पति-पत्नी
  • बिलपत = विलाप करते हैं
  • सोक अति = अत्यंत शोक
  • आरत = दुःखी होकर
  • पुकार = पुकार

बिप्र एक बालक मृतक राखेउ राम दुआर = एक ब्राह्मण ने अपना मरा बालक श्रीराम के द्वार पर रख दिया। दंपति बिलपत सोक अति = पति-पत्नी अत्यंत शोक से विलाप करते हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

एक ब्राह्मण तथा उसकी स्त्री ने अपना मरा हुआ बालक लाकर श्रीराम के द्वार पर रख दिया। पति-पत्नी शोक से अत्यंत दुःखी होकर विलाप करते हुए पुकार कर रहे थे।

यह उत्तरकांड का प्रसिद्ध प्रसंग है। रामराज्य में अकाल मृत्यु नहीं होनी चाहिए थी, इसीलिए ब्राह्मण न्याय माँगने राजद्वार पर आया।

तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘अशुभ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में गंभीर चेतावनी देता है जहाँ संतान का स्वास्थ्य या किसी की असमय मृत्यु की आशंका हो। इस समय स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल अशुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सावधानी:

  • संतान का स्वास्थ्य या सुरक्षा
  • किसी की गंभीर बीमारी या अस्वस्थता
  • असमय आने वाला कोई संकट
  • न्याय या सहायता के लिए की जा रही पुकार
  • परिवार में शोक की आशंका

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल अशुभ है। स्वास्थ्य, विशेषकर बच्चों का, सर्वोच्च प्राथमिकता दें। चिकित्सा में देर न करें। परंतु ध्यान रहे — इसी कथा में आगे बालक जीवित हुआ था।

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