रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 7 — राजाओं का उपहार लेकर आना और प्रभु द्वारा सबका सम्मान; अनुपम मंगल शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। प्रस्तुत दोहा षष्ठम सर्ग के दूसरे सप्तक में सातवाँ स्थान पर है, जहाँ पुनर्मिलन और कुशल-क्षेम के शुभ संकेत मिलते हैं।
राजाओं का उपहार और सबका सम्मान — यह अनुपम शकुन है।
मूल दोहा: भाँति भाँति उपहार लेइ मिलत जुहारत भूप। पहिराए सनमानि सब तुलसी सगुन अनूप॥७॥
शब्दार्थ:
- भाँति भाँति = नाना प्रकार के
- उपहार = भेंट
- लेइ = लेकर
- मिलत = मिलते हैं
- जुहारत = अभिवादन करते हैं
- भूप = राजा लोग
- पहिराए = वस्त्राभूषण पहनाए
- सनमानि = सम्मान करके
- अनूप = अनुपम
भाँति भाँति उपहार लेइ मिलत जुहारत भूप = राजा नाना प्रकार के उपहार लेकर मिलते और अभिवादन करते हैं। पहिराए सनमानि सब = प्रभु ने सबका सम्मान कर वस्त्राभूषण पहनाए।
भावार्थ / व्याख्या:
राजा लोग नाना प्रकार के उपहार लेकर मिलते और अभिवादन करते हैं। प्रभु ने सबका सम्मान करके उन्हें वस्त्राभूषण पहनाए। तुलसीदास जी कहते हैं कि यह अनुपम मंगल शकुन है।
यहाँ लेन-देन का सुंदर संतुलन है। राजा उपहार लेकर आए और प्रभु ने उन्हें भी वस्त्राभूषण देकर सम्मानित किया — कोई खाली हाथ नहीं लौटा।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ भेंट, उपहार, सम्मान या पारस्परिक आदान-प्रदान विषय हो। ‘अनूप’ अर्थात् अनुपम — यह सर्वोच्च प्रशंसा है।
शकुन फल:
यह अनुपम मंगल शकुन है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अत्यंत अनुकूल:
- उपहार, भेंट या सम्मान की प्राप्ति
- किसी बड़े समारोह में लोगों का आना
- पारस्परिक आदान-प्रदान और सद्भाव
- सामाजिक प्रतिष्ठा और मान्यता
- धन, वस्त्र या मूल्यवान वस्तु का लाभ
इस दोहे के आने पर अनुपम मंगल का संकेत है। जो देंगे वह लौटकर आएगा — उदारता और सम्मान बनाए रखें।
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