रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 3 — मेघ रूप श्रीराम द्वारा अकाल रूपी कुंभकर्ण का नाश; सुवृष्टि और अकाल-निवारण का शकुन।
शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। पंचम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें तीसरा दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः उद्यम और पुरुषार्थ की ओर संकेत करते हैं।
श्रीराम मेघ रूप में — सुवृष्टि होगी, अकाल दूर होगा।
मूल दोहा: राम स्याम बारिद सघन बसन सुदामिनि माल। बरषत सर हरषत बिबुध दला दुकालु दयाल॥३॥
शब्दार्थ:
- स्याम बारिद = काले बादल
- सघन = घने
- बसन = वस्त्र
- सुदामिनि माल = बिजली की माला
- बरषत सर = बाण-वर्षा करते हैं
- हरषत बिबुध = देवता प्रसन्न होते हैं
- दला = नष्ट कर दिया
- दुकालु = अकाल (कुंभकर्ण)
- दयाल = दयालु
राम स्याम बारिद सघन, बसन सुदामिनि माल = श्रीराम घने काले मेघ और उनके वस्त्र बिजली की माला के समान हैं। दला दुकालु दयाल = दयालु ने अकाल रूपी कुंभकर्ण को नष्ट कर दिया।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीराम घने काले मेघ के समान हैं और उनके वस्त्र विद्युत-माला के समान हैं। उनके बाण-वर्षा करने से देवता प्रसन्न होते हैं। इस प्रकार उन दयालु ने अकाल रूपी कुंभकर्ण को नष्ट कर दिया।
यह रूपक अत्यंत सुंदर है। पिछले दोहे में कुंभकर्ण अकाल था और यहाँ श्रीराम मेघ हैं। जब मेघ बरसता है, अकाल स्वयं समाप्त हो जाता है।
तुलसीदास जी इसका शकुन-फल बताते हैं — सुवृष्टि होगी और अकाल दूर होगा। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ अभाव, तंगी या कठिन दौर से निकलना विषय हो।
शकुन फल:
यह शकुन सुवृष्टि और अकाल-निवारण का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- अच्छी वर्षा और फसल
- आर्थिक तंगी या अभाव से मुक्ति
- किसी बड़े संकट का समाधान
- कठिन दौर के बाद समृद्धि
- किसी शक्तिशाली बाधा का अंत
इस दोहे के आने पर सुवृष्टि होगी और अकाल दूर होगा। जो अभाव या कठिनाई चल रही थी, उसका अंत निकट है।
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