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रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 6

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 6 श्लोक 6 — अपशकुनों की अनदेखी कर युद्ध को चलती राक्षस सेना; यह प्रश्न-फल विनाश सूचक है।

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तुलसीदास जी की यह कृति प्रश्न और उत्तर की उस प्राचीन पद्धति को जीवित रखती है जिसमें रामकथा ही प्रमाण है। इस छठे सप्तक के छठा दोहे में पंचम सर्ग का वह भाव है जो कहता है — प्रयत्न मत छोड़ो, मार्ग निकल आएगा।

अपशकुनों की अनदेखी — यह प्रश्न-फल विनाश सूचक है।

मूल दोहा: साजि साजि बाहन चलाहिं जातुधानु बलवानु। असगुन असुभ न गनहिं गत आइ कालु नियरानु॥६॥

शब्दार्थ:

  • साजि साजि = सजा-सजाकर
  • बाहन = सवारी, वाहन
  • चलाहिं = चलाते हैं
  • जातुधानु = राक्षस
  • बलवानु = बलवान
  • असगुन = अपशकुन
  • न गनहिं = गिनते नहीं
  • आइ कालु = काल आ गया
  • नियरानु = समीप

साजि साजि बाहन चलाहिं जातुधानु बलवानु = बलवान राक्षस वाहन सजाकर चलते हैं। असगुन असुभ न गनहिं = अपशकुनों को गिनते नहीं।

भावार्थ / व्याख्या:

बलवान राक्षस वाहन सजाकर चलते हैं। अशुभ सूचक अपशकुन हो रहे हैं, पर वे उन्हें गिनते नहीं, क्योंकि उनकी आयु समाप्त हो गई है और मृत्यु-काल समीप आ गया है।

यह दोहा शकुन-शास्त्र की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा देता है — शकुन इसलिए नहीं होते कि उन्हें अनदेखा किया जाए। जो व्यक्ति चेतावनियों की अनदेखी करता है, उसका पतन निश्चित है।

तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘विनाश सूचक’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा रामाज्ञा प्रश्न की सबसे कठोर चेतावनियों में से एक है। इसका संदेश स्पष्ट है — जो संकेत मिल रहे हैं, उन्हें गंभीरता से लें।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल विनाश सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में गंभीर चेतावनी:

  • चेतावनियों और संकेतों की लगातार अनदेखी
  • बल या साधनों के भरोसे लिया जा रहा जोखिम
  • सलाह ठुकराकर आगे बढ़ने का निर्णय
  • कोई बड़ा और अपरिवर्तनीय कदम
  • स्वास्थ्य या सुरक्षा के संकेतों की उपेक्षा

इस दोहे के आने पर विनाश की स्पष्ट चेतावनी है। जो संकेत मिल रहे हैं उन्हें अनदेखा करना अत्यंत हानिकारक होगा। तुरंत रुकें और पुनर्विचार करें।

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