रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 6

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 6 — समुद्र का मार्ग न देना और तुलसीदास जी की टिप्पणी; यह प्रश्न-फल झगड़ा सूचित करता है।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। पंचम सर्ग के पाँचवें सप्तक का छठा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें युद्ध, विजय और शत्रु-पराजय के संकेत छिपे हैं।

समुद्र का मार्ग न देना — यह प्रश्न-फल झगड़ा सूचित करता है।

मूल दोहा: कृपासिंधु प्रभु सिंधु सन मागेउ पंथ न देत। बिनय न मानहिं जीव जड़ डाटे नवहिं अचेत॥६॥

शब्दार्थ:

  • कृपासिंधु = कृपा के सागर
  • सिंधु सन = समुद्र से
  • मागेउ पंथ = मार्ग माँगा
  • न देत = नहीं देता
  • बिनय न मानहिं = प्रार्थना नहीं मानते
  • जीव जड़ = मूर्ख प्राणी
  • डाटे = डाँटने पर
  • नवहिं = झुकते हैं
  • अचेत = बुद्धिहीन

प्रभु सिंधु सन मागेउ पंथ न देत = प्रभु ने समुद्र से मार्ग माँगा, पर वह नहीं देता। बिनय न मानहिं जीव जड़, डाटे नवहिं अचेत = मूर्ख प्रार्थना से नहीं मानते, डाँटने पर ही झुकते हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

कृपासागर प्रभु ने समुद्र से लंका जाने का मार्ग माँगा, पर वह मार्ग नहीं देता। तुलसीदास जी टिप्पणी करते हैं — मूर्ख प्राणी प्रार्थना करने से नहीं मानते, बुद्धिहीन लोग तो डाँटने से ही झुकते हैं।

श्रीराम ने तीन दिन विनयपूर्वक प्रतीक्षा की। जब कोई उत्तर नहीं मिला, तब उन्होंने धनुष उठाया — और तभी समुद्र प्रकट हुआ।

तुलसीदास जी कहते हैं कि यह प्रश्न-फल झगड़ा सूचित करता है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में चेतावनी देता है जहाँ किसी से सहयोग माँगा जा रहा हो और वह टाल रहा हो — विवाद की स्थिति बन सकती है।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल झगड़ा सूचित करता है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • किसी से सहयोग या अनुमति माँगना
  • बार-बार निवेदन के बाद भी टाल-मटोल
  • विवाद या टकराव बनने की संभावना
  • विनम्रता से न सुलझने वाला मामला
  • किसी हठी या अड़ियल व्यक्ति से काम

इस दोहे के आने पर झगड़े की संभावना है। पहले विनम्रता से प्रयास करें, पर यदि कोई बार-बार टाल रहा हो तो दृढ़ता दिखानी पड़ सकती है। संयम बनाए रखें।

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