रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 5 — श्रीराम के प्रस्थान पर देव-नगाड़े और वीरों की गर्जना; विजय, कीर्ति और शरीर-कुशलता का शकुन।

4

तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। पंचम सर्ग के पाँचवें सप्तक का पाँचवाँ दोहा प्रस्तुत है, जिसमें युद्ध, विजय और शत्रु-पराजय के संकेत छिपे हैं।

प्रस्थान के समय नगाड़े और गर्जना — विजय, कीर्ति और शरीर सकुशल।

मूल दोहा: राम पयान निसान नभ बाजहिं गाजहिं बीर। सगुन सुमंगल समय जय कीरति कुसल सरीर॥५॥

शब्दार्थ:

  • पयान = प्रस्थान
  • निसान = नगाड़े
  • नभ = आकाश में
  • बाजहिं = बजते हैं
  • गाजहिं = गर्जना करते हैं
  • बीर = वीर
  • समय जय = युद्ध में विजय
  • कीरति = कीर्ति
  • कुसल सरीर = शरीर सकुशल

राम पयान निसान नभ बाजहिं गाजहिं बीर = प्रस्थान के समय आकाश में नगाड़े बज रहे हैं और वीर गर्जना कर रहे हैं। जय कीरति कुसल सरीर = विजय, कीर्ति मिलेगी और शरीर सकुशल रहेगा।

भावार्थ / व्याख्या:

श्रीरामजी के प्रस्थान के समय आकाश में देवताओं के नगाड़े बज रहे हैं और वीर वानर गर्जना कर रहे हैं।

तुलसीदास जी इसका शकुन-फल तीन भागों में बताते हैं — युद्ध में विजय मिलेगी, कीर्ति मिलेगी और शरीर सकुशल रहेगा।

तीसरा फल विशेष महत्वपूर्ण है। युद्ध में विजय मिलना एक बात है और घायल हुए बिना लौटना दूसरी। यह दोहा दोनों का आश्वासन देता है। शकुन की दृष्टि से यह उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ जोखिम भरे कार्य में सुरक्षा की चिंता हो।

शकुन फल:

यह शकुन विजय, कीर्ति और शरीर की कुशलता का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • प्रतियोगिता, मुकदमा या संघर्ष में विजय
  • जोखिम भरे कार्य में शारीरिक सुरक्षा
  • नाम, यश और प्रतिष्ठा की प्राप्ति
  • सेना, पुलिस या सुरक्षा-सेवा से जुड़ा प्रश्न
  • बड़े अभियान का शुभारंभ

इस दोहे के आने पर विजय, कीर्ति और शारीरिक कुशलता तीनों का संकेत है। निर्भय होकर आगे बढ़ें — आप सुरक्षित लौटेंगे।

आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करें

हर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है।

सहयोग करें

टिप्पणियाँ बंद हैं।