रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 4

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 4 — हनुमानजी का सीताजी को चिंता त्यागने का आश्वासन; श्रेष्ठ प्रश्न-फल।

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इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। पंचम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह चौथा दोहा है; इस सर्ग में कठिनाई को पार करने का बल बार-बार दिखाई देता है।

चिंता त्यागने का आश्वासन — प्रश्न-फल श्रेष्ठ है।

मूल दोहा: समाचार कहि सुनत प्रभु सानुज सहित सहाय। आए अब रघुबंस मनि, सोचु परिहरिय माय॥४॥

शब्दार्थ:

  • समाचार कहि = समाचार कहूँगा
  • सुनत = सुनते ही
  • सानुज = छोटे भाई सहित
  • सहाय = सहायक, सेना
  • रघुबंस मनि = रघुवंश के मणि (श्रीराम)
  • सोचु = चिंता
  • परिहरिय = त्याग दो
  • माय = माता

समाचार कहि सुनत प्रभु सानुज सहित सहाय = समाचार सुनते ही प्रभु भाई और सहायकों सहित। सोचु परिहरिय माय = माता, चिंता त्याग दो।

भावार्थ / व्याख्या:

हनुमानजी कहते हैं — ‘मैं लौटकर समाचार कहूँगा, उसे सुनते ही प्रभु श्रीरघुनाथजी छोटे भाई तथा सहायकों सहित यहाँ पहुँच ही गए, ऐसा मानकर, माता! चिंता त्याग दो।’

इस दोहे में हनुमानजी की भाषा ध्यान देने योग्य है। वे भविष्य की बात वर्तमान में कह रहे हैं — ‘आ ही गए’ — क्योंकि उन्हें अपने स्वामी पर पूर्ण विश्वास है।

तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘श्रेष्ठ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा चिंता-निवारण का स्पष्ट संकेत देता है और उन प्रश्नकर्ताओं के लिए है जो व्यर्थ की चिंता में घुल रहे हैं।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है और चिंता-निवारण का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • लंबे समय से चली आ रही चिंता या तनाव
  • किसी की सहायता या हस्तक्षेप की प्रतीक्षा
  • बड़ी संख्या में लोगों का सहयोग मिलना
  • भविष्य को लेकर बनी हुई आशंका
  • किसी बड़े व्यक्ति की सहायता से हल होने वाला मामला

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। चिंता त्याग दें — सहायता आ रही है और वह पर्याप्त होगी।

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