रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 3 — हनुमानजी की प्रतिज्ञा ‘अब देर नहीं, दोनों भाई आ गए समझो’; उत्तम प्रश्न-फल।
शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। पंचम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह तीसरा दोहा है; इस सर्ग में कठिनाई को पार करने का बल बार-बार दिखाई देता है।
हनुमानजी की प्रतिज्ञा — अब देर नहीं, प्रश्न-फल उत्तम है।
मूल दोहा: नाथ सपथ पन रोपि कपि कहत चरन सिरु नाइ। नाहिं बिलंब जगदंब अब आइ गए दोउ भाइ॥३॥
शब्दार्थ:
- नाथ सपथ = स्वामी की शपथ
- पन रोपि = प्रतिज्ञा करके
- चरन सिरु नाइ = चरणों में मस्तक झुकाकर
- नाहिं बिलंब = देर नहीं है
- जगदंब = जगन्माता
- आइ गए = आ ही गए
- दोउ भाइ = दोनों भाई
नाथ सपथ पन रोपि कपि कहत = स्वामी की शपथ लेकर प्रतिज्ञापूर्वक हनुमानजी कहते हैं। नाहिं बिलंब जगदंब अब आइ गए दोउ भाइ = जगन्माता, अब देर नहीं, दोनों भाई आ ही गए समझो।
भावार्थ / व्याख्या:
स्वामी श्रीराम की शपथ करके, प्रतिज्ञापूर्वक, श्रीजानकीजी के चरणों में मस्तक झुकाकर हनुमानजी कहते हैं — ‘जगन्माता! अब देर नहीं है, दोनों भाई आ ही गए, ऐसा मानो।’
यह सेवक का सबसे बड़ा आश्वासन है। हनुमानजी ने केवल आशा नहीं जगाई, शपथ लेकर प्रतिज्ञा की।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘उत्तम’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में अत्यंत अनुकूल है जहाँ प्रतीक्षा लंबी हो गई हो और पूछा जा रहा हो कि ‘कब होगा?’ — उत्तर है, शीघ्र।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल उत्तम है और शीघ्र फल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- ‘यह काम कब होगा’ — शीघ्रता का प्रश्न
- लंबी प्रतीक्षा के बाद निकट आया परिणाम
- किसी के आने या लौटने की प्रतीक्षा
- किसी वचन या प्रतिज्ञा का निभाया जाना
- निराशा के बीच मिलने वाला दृढ़ आश्वासन
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है — अब देर नहीं है। जिस बात की प्रतीक्षा है वह शीघ्र होगी। धैर्य का यह अंतिम चरण है।
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