रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 7 — हनुमानजी का राम-गुण वर्णन कर परिचय देना और कुशल समाचार सुनाना; प्रियजन समाचार का शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। प्रस्तुत दोहा पंचम सर्ग के दूसरे सप्तक में सातवाँ स्थान पर है, जहाँ साहस, संदेश और यात्रा से जुड़े प्रश्नों का उत्तर मिलता है।
हनुमानजी का परिचय और कुशल-संदेश — प्रियजन का समाचार मिलेगा।
मूल दोहा: तुलसी प्रभु गुन गन बरनि आपनि बात जनाइ। कुसल खेम सुग्रीव पुर रामु लखनु दोउ भाइ॥७॥
शब्दार्थ:
- प्रभु गुन गन = प्रभु के गुण-समूह
- बरनि = वर्णन करके
- आपनि बात जनाइ = अपना परिचय दिया
- कुसल खेम = कुशल-क्षेम
- सुग्रीव पुर = सुग्रीव की नगरी (किष्किंधा)
- दोउ भाइ = दोनों भाई
प्रभु गुन गन बरनि आपनि बात जनाइ = प्रभु के गुणों का वर्णन करके अपना परिचय दिया। कुसल खेम सुग्रीव पुर = किष्किंधा में दोनों भाई कुशल हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
तुलसीदास जी कहते हैं कि हनुमानजी ने श्रीजानकीजी से प्रभु श्रीराम के गुणों का वर्णन करके अपना परिचय दिया और कहा कि सुग्रीव की नगरी किष्किंधा में श्रीराम-लक्ष्मण दोनों भाई कुशलपूर्वक हैं।
यहाँ हनुमानजी की बुद्धिमत्ता दिखाई देती है। वे सीधे सामने नहीं आए — पहले वृक्ष पर बैठकर श्रीराम की कथा सुनाई, ताकि सीताजी को विश्वास हो जाए और वे भयभीत न हों।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा प्रियजन के समाचार का सूचक है। साथ ही यह मार्गदर्शन भी देता है — किसी अपरिचित से बात करते समय पहले विश्वास स्थापित करना आवश्यक है।
शकुन फल:
यह शकुन प्रियजन का समाचार मिलने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- दूर बैठे परिवार या मित्रों का कुशल समाचार
- किसी अपरिचित से विश्वास स्थापित करना
- अपना परिचय या पक्ष प्रस्तुत करना
- संदेश पहुँचाने या लाने का कार्य
- लंबे समय से टूटा संपर्क फिर से जुड़ना
इस दोहे के आने पर प्रियजन का समाचार मिलेगा और वह कुशल का होगा। बात करते समय पहले विश्वास बनाएँ — फिर मूल बात कहें।
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