रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 6 — त्रिजटा की भविष्यवाणी कि आज ही राम-सेवक मिलेगा; प्रियजन का कुशल समाचार मिलने का शकुन।
तुलसीदास जी की यह कृति प्रश्न और उत्तर की उस प्राचीन पद्धति को जीवित रखती है जिसमें रामकथा ही प्रमाण है। प्रस्तुत दोहा पंचम सर्ग के दूसरे सप्तक में छठा स्थान पर है, जहाँ साहस, संदेश और यात्रा से जुड़े प्रश्नों का उत्तर मिलता है।
त्रिजटा की भविष्यवाणी — प्रियजन का कुशल समाचार आज ही मिलेगा।
मूल दोहा: सगुन समुझि त्रिजटा कहति, सुनु अबहीं आजु। मिलिहि राम सेवक कहिहि कुसल लखनु रघुराजु॥६॥
शब्दार्थ:
- सगुन समुझि = शकुन को समझकर
- त्रिजटा कहति = त्रिजटा कहती है
- सुनु = सुनो
- अबहीं आजु = अभी, आज ही
- मिलिहि = मिलेगा
- राम सेवक = श्रीराम का सेवक
- कहिहि = कहेगा
- कुसल = कुशल समाचार
सगुन समुझि त्रिजटा कहति = शकुन को समझकर त्रिजटा कहती है। मिलिहि राम सेवक कहिहि कुसल लखनु रघुराजु = श्रीराम का सेवक मिलेगा और लक्ष्मण-रघुनाथजी की कुशल कहेगा।
भावार्थ / व्याख्या:
शकुन को समझकर त्रिजटा कहती है — ‘जानकीजी, सुनो। आज अभी श्रीराम का सेवक मिलेगा और लक्ष्मण तथा रघुनाथजी की कुशल कहेगा।’
त्रिजटा राक्षसी थी, फिर भी सीताजी की सबसे बड़ी सहायक बनी। यह बताता है कि सहायता किसी भी दिशा से आ सकती है — जाति, कुल या पक्ष से नहीं।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा अत्यंत विशिष्ट है, क्योंकि इसमें समय भी बताया गया है — ‘अबहीं आजु’ अर्थात् अभी, आज ही। यह उन प्रश्नों में अनुकूल है जहाँ शीघ्र समाचार या शीघ्र समाधान प्रतीक्षित हो।
शकुन फल:
यह शकुन प्रियजन का कुशल समाचार शीघ्र मिलने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- शीघ्र मिलने वाला कुशल समाचार
- किसी की कुशलता या स्वास्थ्य की चिंता
- अप्रत्याशित पक्ष से मिलने वाली सहायता
- किसी संदेशवाहक या प्रतिनिधि का आगमन
- कठिन परिस्थिति में मिलने वाला आश्वासन
इस दोहे के आने पर प्रियजन का कुशल समाचार शीघ्र प्राप्त होगा। सहायता अप्रत्याशित दिशा से आ सकती है — किसी को पहले से आँकें नहीं।
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