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रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 4

रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 4 श्लोक 4 — मंगलमूर्ति श्रीराम की कृपा से पुत्र-प्राप्ति; इस शकुन का विशेष फल।

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सात सर्ग, प्रत्येक सर्ग में सात सप्तक और प्रत्येक सप्तक में सात दोहे — यही ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की सरल किंतु सुगठित संरचना है। यह दोहा चतुर्थ सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से चौथा है — यहाँ गुरु का आशीर्वाद और कुल की वृद्धि प्रमुख भाव हैं।

श्रीराम की कृपा से पुत्र-प्राप्ति — इस शकुन का विशेष फल।

मूल दोहा: मंगल मूरति मोद निधि, मधुर मनोहर बेष। राम अनुग्रह पुत्र फल होइहि सगुन बिसेष॥४॥

शब्दार्थ:

  • मंगल मूरति = मंगल की मूर्ति
  • मोद निधि = आनंद का भंडार
  • मधुर = मधुरिमामय
  • मनोहर बेष = मनोहर रूप
  • राम अनुग्रह = श्रीराम की कृपा
  • पुत्र फल = पुत्र रूपी फल
  • होइहि = होगा
  • सगुन बिसेष = शकुन का विशेष फल

मंगल मूरति मोद निधि = मंगल की मूर्ति और आनंद के भंडार। राम अनुग्रह पुत्र फल होइहि = श्रीराम की कृपा से पुत्र होगा।

भावार्थ / व्याख्या:

मंगल की मूर्ति, आनंद-निधि, मधुरिमामय और मनोहर रूप वाले श्रीरघुनाथजी की कृपा से पुत्र होगा — यह इस शकुन का विशेष फल है।

‘सगुन बिसेष’ अर्थात् इस शकुन का विशेष फल — तुलसीदास जी यहाँ सामान्य फल की बात नहीं कर रहे, बल्कि विशेष रूप से पुत्र-प्राप्ति का उल्लेख कर रहे हैं।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा संतान-प्राप्ति संबंधी प्रश्नों में स्पष्ट और सीधा शुभ उत्तर देता है। रामाज्ञा प्रश्न में ऐसे दोहे कम हैं जो इतने विशिष्ट फल की घोषणा करते हों।

शकुन फल:

यह शकुन विशेष रूप से पुत्र-प्राप्ति का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • संतान प्राप्ति, विशेषकर पुत्र-लाभ
  • संतान के लिए किया जा रहा उपाय या उपचार
  • परिवार में नए सदस्य का आगमन
  • श्रीराम की कृपा और भक्ति का फल
  • लंबे समय से प्रतीक्षित मनोकामना

इस दोहे के आने पर श्रीराम की कृपा से पुत्र-प्राप्ति का विशेष संकेत है। श्रद्धा बनाए रखें — यह शकुन बहुत स्पष्ट है।

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