रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 7 श्लोक 6 — संपाती को नए पंख और सीता का समाचार; कठिनाई से पार होने का मार्ग मिलने का शुभ शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। तृतीय सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें छठा दोहा — इस सर्ग में शुभ और अशुभ का अंतर बहुत स्पष्ट दिखाई देता है।
संपाती का नया शरीर और सीता का समाचार — कठिनाई से पार होने का मार्ग।
मूल दोहा: नव तनु पाइ देखाइ प्रभु महिमा कथा सुनाइ। धरहु धीर साहस करहु मुदित सीय सुधि पाइ॥६॥
शब्दार्थ:
- नव तनु = नया शरीर
- पाइ = पाकर
- देखाइ = दिखलाकर
- महिमा = महिमा
- कथा सुनाइ = अपनी कथा सुनाकर
- धरहु धीर = धैर्य धारण करो
- साहस करहु = साहस बटोरो
- मुदित = प्रसन्न
- सीय सुधि = सीताजी का समाचार
नव तनु पाइ देखाइ प्रभु महिमा = नया शरीर पाकर प्रभु की महिमा प्रत्यक्ष दिखलाकर। धरहु धीर साहस करहु = धैर्य धारण करो, साहस बटोरो।
भावार्थ / व्याख्या:
नवीन शरीर पाकर और प्रभु की महिमा प्रत्यक्ष दिखलाकर तथा अपनी कथा सुनाकर संपाती ने कहा — धैर्य धारण करो, साहस बटोरो, सीताजी का समाचार पाकर प्रसन्न होगे।
संपाती के पंख सूर्य के ताप से जल गए थे, परंतु श्रीराम का कार्य करने पर उन्हें नए पंख मिल गए। यह प्रभु की महिमा का प्रत्यक्ष प्रमाण था।
तुलसीदास जी इसका फल बताते हैं — कठिनाई से पार होने का मार्ग मिलेगा। शकुन की दृष्टि से यह दोहा अत्यंत आशाजनक है। यह उन प्रश्नकर्ताओं के लिए है जो हार मानने की कगार पर हैं — मार्ग वहीं से खुलेगा जहाँ से आपने आशा छोड़ दी थी।
शकुन फल:
यह शकुन कठिनाई से पार होने का मार्ग मिलने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- किसी कठिनाई से निकलने का उपाय
- निराशा के बाद मिलने वाली नई दिशा
- खोई हुई क्षमता या स्वास्थ्य की वापसी
- किसी अनुभवी व्यक्ति से मिलने वाला मार्गदर्शन
- प्रतीक्षित समाचार या सूचना की प्राप्ति
इस दोहे के आने पर कठिनाई से पार होने का मार्ग मिलेगा। धैर्य रखें और साहस बटोरें — जिस दिशा से निराशा आई थी, उसी से समाधान भी आएगा।
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