रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 7 श्लोक 1 — प्रभु का आशीर्वाद और मुद्रिका लेकर हनुमानजी का प्रस्थान; यात्रा के लिए उत्तम प्रश्न-फल।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। तृतीय सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें पहला दोहा — इस सर्ग में शुभ और अशुभ का अंतर बहुत स्पष्ट दिखाई देता है।
हनुमानजी का प्रस्थान — यात्रा के लिए उत्तम प्रश्न-फल।
मूल दोहा: नाथ हाथ माथे धरेउ प्रभु मुदरी मूँह मेलि। चलेउ सुमिरि सारंगधर, आनिहि सिद्धि सकेलि॥१॥
शब्दार्थ:
- नाथ हाथ माथे धरेउ = प्रभु ने मस्तक पर हाथ रखा
- मुदरी = अँगूठी
- मूँह मेलि = मुख में रखकर
- चलेउ = चले
- सुमिरि = स्मरण करके
- सारंगधर = शार्ङ्ग धनुषधारी (श्रीराम)
- आनिहि = ले आएँगे
- सिद्धि सकेलि = सफलताओं को समेटकर
नाथ हाथ माथे धरेउ = प्रभु ने मस्तक पर हाथ रखा। आनिहि सिद्धि सकेलि = वे सफलताओं को समेट लाएँगे।
भावार्थ / व्याख्या:
प्रभु ने हनुमानजी के मस्तक पर आशीर्वाद का हाथ रखा। उनकी अँगूठी को मुख में रखकर, उन शार्ङ्गधनुषधारी का स्मरण करके हनुमानजी चल पड़े। तुलसीदास जी कहते हैं कि वे सफलताओं को समेट लाएँगे।
‘सिद्धि सकेलि’ अत्यंत सुंदर पद है। सकेलना अर्थात् समेटना — जैसे कोई बिखरी हुई वस्तुओं को एक साथ बटोर ले। अर्थात् हनुमानजी एक नहीं, अनेक सफलताएँ एक साथ लाएँगे — और वास्तव में ऐसा ही हुआ।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा यात्रा के लिए उत्तम फल देता है। यह उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ किसी कार्य से यात्रा पर निकलना हो और उसमें एक से अधिक उद्देश्य पूरे करने हों।
शकुन फल:
यह यात्रा के लिए उत्तम प्रश्न-फल है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कार्यवश यात्रा या प्रस्थान
- एक यात्रा में कई उद्देश्य पूरे करना
- किसी बड़े के आशीर्वाद से आरंभ किया जा रहा कार्य
- कठिन या दूर की यात्रा
- किसी महत्वपूर्ण मिशन या दायित्व का निर्वाह
इस दोहे के आने पर यात्रा के लिए उत्तम फल है। आप एक नहीं, अनेक सफलताएँ समेटकर लौटेंगे। बड़ों का आशीर्वाद लेकर प्रस्थान करें।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।