रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 2 श्लोक 7 — चित्रकूट में पयस्विनी तट पर श्रीराम का निवास; तप, जप और योग-साधना का मंगलप्रद शकुन।

5

॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। प्रस्तुत दोहा द्वितीय सर्ग के दूसरे सप्तक में सातवाँ स्थान पर है, जहाँ हर्ष और वियोग — दोनों प्रकार के प्रसंग आते हैं।

चित्रकूट में निवास — तप, जप और योग-साधना के लिए मंगलप्रद।

मूल दोहा: चित्रकुट पय तीर प्रभु बसे भानु कुल भानु। तुलसी तप जप जोग हित सगुन सुमंगल जानु॥७॥

शब्दार्थ:

  • चित्रकुट = चित्रकूट
  • पय तीर = पयस्विनी नदी के किनारे
  • बसे = निवास किया
  • भानु कुल भानु = सूर्यकुल के सूर्य (श्रीराम)
  • तप = तपस्या
  • जप = जप
  • जोग = योग-साधना
  • हित = के लिए

चित्रकुट पय तीर प्रभु बसे = प्रभु ने चित्रकूट में पयस्विनी के तीर निवास किया। सगुन सुमंगल जानु = यह शकुन मंगलप्रद समझो।

भावार्थ / व्याख्या:

सूर्यकुल के सूर्य प्रभु श्रीराम ने चित्रकूट में पयस्विनी नदी के किनारे निवास किया। तुलसीदास जी कहते हैं कि तपस्या, जप तथा योग-साधना के लिए यह शकुन मंगलप्रद समझो।

चित्रकूट रामायण का वह स्थान है जहाँ वनवास का सबसे शांत और सुंदर काल बीता। वहाँ श्रीराम को ऋषियों का सान्निध्य मिला और भरत मिलाप भी वहीं हुआ।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा स्थिरता और साधना का संकेत देता है। यह बताता है कि इस समय एक स्थान पर टिककर, धैर्य से साधना या कार्य करना अधिक फलदायी होगा — बार-बार स्थान या योजना बदलना नहीं।

शकुन फल:

यह शकुन तप, जप और योग-साधना के लिए मंगलप्रद है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • साधना, ध्यान या योग का अभ्यास
  • एक स्थान पर टिककर दीर्घकालिक कार्य
  • शांत, एकांत स्थान पर निवास या आश्रम
  • अध्ययन, शोध या गहन एकाग्रता का कार्य
  • मन की शांति और स्थिरता से जुड़े प्रश्न

इस दोहे के आने पर स्थिरता और साधना का संकेत मिलता है। बार-बार योजना या स्थान न बदलें — एक जगह टिककर किया गया प्रयत्न ही फल देगा।

आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करें

हर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है।

सहयोग करें

टिप्पणियाँ बंद हैं।