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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 5 — श्रीराम रूपी सूर्य के उदय से उल्लू समान अभिमानी राजाओं का छिपना; पराजय सूचक शकुन।

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तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। प्रथम सर्ग के पाँचवें सप्तक का पाँचवाँ दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राम-नाम के प्रभाव से बनने वाले शुभ योग की झलक मिलती है।

अभिमानी राजाओं का पराभव — यह दोहा पराजय का सूचक है।

मूल दोहा: उदित भानु कुल भानु लखि लुके उलूक नरेस। गये गँवाई गरूर पति, धनु मिस हये महेस॥५॥

शब्दार्थ:

  • उदित = उदित, उदय हुए
  • भानु कुल भानु = सूर्यकुल के सूर्य (श्रीराम)
  • लुके = छिप गए
  • उलूक नरेस = उल्लू के समान राजा
  • गरूर = गर्व, अभिमान
  • पति = सम्मान, प्रतिष्ठा
  • धनु मिस = धनुष के बहाने
  • हये = नष्ट किया
  • महेस = महेश (शंकरजी)

लुके उलूक नरेस = उल्लू के समान राजा छिप गए। धनु मिस हये महेस = मानो शंकरजी ने धनुष के बहाने उन्हें नष्ट कर दिया।

भावार्थ / व्याख्या:

सूर्यकुल के सूर्य श्रीराम को उदित देखकर उल्लुओं के समान अभिमानी राजा अपना गर्व और सम्मान खोकर छिप गए। मानो शंकरजी ने ही अपने धनुष के बहाने उन्हें नष्ट कर दिया।

उल्लू का रूपक अत्यंत सटीक है। उल्लू अंधकार में स्वयं को शक्तिशाली समझता है, पर सूर्य उदय होते ही उसे छिपना पड़ता है। इसी प्रकार अभिमानी राजा तब तक बलशाली दिखते रहे जब तक श्रीराम सामने नहीं आए।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा पराजय और निकृष्ट फल का सूचक है। यह चेतावनी देता है कि यदि आप किसी से टकराव में हैं और आपके पक्ष में अभिमान या अनुचित बल का प्रयोग हो रहा है, तो परिणाम प्रतिकूल होगा। इस समय विनम्रता ही एकमात्र बचाव है।

शकुन फल:

यह शकुन पराजय का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम प्रतिकूल रह सकता है:

  • प्रतियोगिता, चुनाव या मुकाबले में उतरना
  • मुकदमा या विवाद जिसमें अपना पक्ष कमज़ोर हो
  • किसी अधिक शक्तिशाली व्यक्ति या संस्था से टकराव
  • अहंकार या ज़िद से लिया जा रहा निर्णय
  • ऐसा कार्य जिसमें प्रतिष्ठा दाँव पर हो

इस दोहे के आने पर प्रश्न का फल पराजय सूचक है। टकराव से बचें, अहंकार त्यागें और समझौते का मार्ग खोजें। समय प्रतिकूल है — प्रतीक्षा करना ही उचित रहेगा।

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