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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 7 — दशरथ रूपी चन्द्रमा के उदय से जनकपुर के कुमुद प्रफुल्लित; प्रियजन मिलन का शुभ शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। यह दोहा प्रथम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से सातवाँ है — इस सर्ग में दैव की अनुकूलता और मनोरथ-पूर्ति का भाव प्रमुख है।

यह दोहा प्रियजन के मिलन का विशेष संकेत देता है।

मूल दोहा: दसरथ पुरन परम बिधू, उदित समय संजोग। जनक नगर सर कुमुदगन, तुलसी प्रमुदित लोग॥७॥

शब्दार्थ:

  • पुरन परम बिधू = पूर्ण चन्द्रमा
  • उदित = उदय हुआ
  • संजोग = संयोग
  • सर = सरोवर
  • कुमुदगन = कुमुद पुष्पों का समूह
  • प्रमुदित = अत्यंत प्रसन्न

दसरथ पुरन परम बिधू = महाराज दशरथ रूपी पूर्ण चन्द्रमा का उदय हुआ। जनक नगर सर कुमुदगन = जनकपुर रूपी सरोवर के कुमुद पुष्प (नगरवासी) प्रफुल्लित हो गए।

भावार्थ / व्याख्या:

तुलसीदास जी एक सुंदर रूपक का प्रयोग करते हैं। महाराज दशरथ पूर्ण चन्द्रमा हैं, जनकपुर एक सरोवर है और नगरवासी उस सरोवर के कुमुद पुष्प हैं।

कुमुद पुष्प चन्द्रमा के उदय होते ही खिल उठते हैं। इसी प्रकार दशरथजी के जनकपुर पहुँचते ही सभी नगरवासी प्रफुल्लित हो गए।

यह रूपक शकुन की दृष्टि से गहरा अर्थ रखता है। यह बताता है कि किसी प्रिय व्यक्ति के आगमन से चारों ओर प्रसन्नता फैलेगी। इसीलिए यह दोहा प्रियजन के मिलन का विशेष सूचक माना जाता है — बिछड़े हुए मिलेंगे और दूर गए हुए लौटेंगे।

शकुन फल:

यह शकुन प्रियजन के मिलन का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:

  • बिछड़े या दूर गए प्रियजन से मिलन
  • परदेश गए व्यक्ति की वापसी
  • रूठे हुए संबंध या मित्रता का पुनः जुड़ना
  • किसी अतिथि या महत्वपूर्ण व्यक्ति का आगमन
  • विवाह या पारिवारिक मिलन समारोह

इस दोहे के आने पर प्रियजन के मिलन का संकेत मिलता है। जिस व्यक्ति की प्रतीक्षा है, उससे भेंट होगी और उस मिलन से चारों ओर प्रसन्नता फैलेगी।

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