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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 5 — देवताओं की पुष्प-वर्षा और श्रीराम की जयकार; उत्तम प्रश्न-फल का शुभ शकुन।

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जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। यह दोहा प्रथम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से पाँचवाँ है — इस सर्ग में दैव की अनुकूलता और मनोरथ-पूर्ति का भाव प्रमुख है।

देवताओं की पुष्प-वर्षा और जयकार — उत्तम प्रश्न-फल का संकेत।

मूल दोहा: हरषि बिबुध बरषहिं सुमन, मंगल गान निसान। जय जय रबिकुल कमल रबि मंगल मोद निधान॥५॥

शब्दार्थ:

  • हरषि = हर्षित होकर
  • बिबुध = देवता
  • बरषहिं सुमन = पुष्प-वर्षा करते हैं
  • निसान = नगाड़े
  • रबिकुल कमल रबि = सूर्यकुल रूपी कमल के लिए सूर्य समान
  • मोद निधान = आनंद के भंडार

हरषि बिबुध बरषहिं सुमन = देवता प्रसन्न होकर पुष्प-वर्षा कर रहे हैं। मंगल मोद निधान = आनंद और मंगल के भंडार श्रीराम की जय हो।

भावार्थ / व्याख्या:

देवता प्रसन्न होकर पुष्प-वर्षा कर रहे हैं, मंगलगीत गाए जा रहे हैं और नगाड़े बज रहे हैं। सूर्यकुल रूपी कमल को प्रफुल्लित करने वाले, आनंद और मंगल के भंडार श्रीरामजी की जय हो, जय हो!

यह दोहा उत्सव के चरम क्षण का चित्र है। जब कोई कार्य इतना शुभ हो कि देवता भी प्रसन्न होकर आशीर्वाद बरसाने लगें — वह क्षण साधारण नहीं होता।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा उत्तम प्रश्न-फल का सूचक है। यह बताता है कि आपके कार्य को केवल मनुष्यों का ही नहीं, ऊपरवाले का भी समर्थन प्राप्त है। ऐसे कार्य में बाधाएँ स्वयं हट जाती हैं।

शकुन फल:

यह शकुन उत्तम फल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:

  • कोई भी शुभ कार्य या उत्सव का आयोजन
  • सार्वजनिक सम्मान, पुरस्कार या मान्यता
  • परिवार या समाज में प्रतिष्ठा बढ़ना
  • किसी बड़ी सफलता या उपलब्धि की संभावना
  • धार्मिक अनुष्ठान या मन्नत का फल

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है। कार्य में दैवी सहायता का संकेत है — सफलता के साथ सम्मान भी मिलेगा।

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