रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 2 — माता कौसल्या और सुमित्रा के चरण-स्मरण से मंगल तथा ब्रह्मा-विष्णु-महेश की सहायता का शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ तुलसीदास जी की उन रचनाओं में गिना जाता है जो भक्ति के साथ-साथ व्यावहारिक मार्गदर्शन भी देती हैं। प्रस्तुत दोहा प्रथम सर्ग के दूसरे सप्तक में दूसरा स्थान पर आता है, जहाँ श्रीराम की महिमा और कार्य-सिद्धि के संकेत मिलते हैं।
यह दोहा माताओं के चरण-स्मरण से कार्य-सिद्धि का मार्ग बताता है।
मूल दोहा: कौसल्या पद नाइ सिर, सुमिरि सुमित्रा पाय। करहु काज मंगल कुसल, बिधि हरि संभु सहाय॥२॥
शब्दार्थ:
- कौसल्या = श्री रामजी की माता कौसल्याजी
- पद नाइ सिर = चरणों में मस्तक झुकाकर
- सुमित्रा = लक्ष्मण-शत्रुघ्न की माता सुमित्राजी
- पाय = चरण
- बिधि = ब्रह्माजी
- हरि = विष्णु भगवान
- संभु = शंकर भगवान
- सहाय = सहायक
करहु काज मंगल कुसल = कार्य करो, आनंद-मंगल और कुशल होगा। बिधि हरि संभु सहाय = ब्रह्मा, विष्णु और शंकर सहायक होंगे।
भावार्थ / व्याख्या:
इस दोहे में तुलसीदास जी माता कौसल्या के चरणों में मस्तक झुकाने और माता सुमित्रा के चरणों का स्मरण करने का उपदेश देते हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि यहाँ किसी देवता का नहीं, बल्कि माताओं का स्मरण कराया गया है। मातृ-चरणों की वंदना भारतीय परंपरा में सबसे बड़ा मंगल माना गया है — जो माता का आशीर्वाद पा लेता है, उसे त्रिदेवों की सहायता स्वतः मिल जाती है।
और यही तुलसीदास जी कहते हैं — ऐसा करके काम करो, आनंद-मंगल होगा और ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर तीनों तुम्हारे सहायक बनेंगे। जब सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक तीनों साथ हों, तो कार्य में असफलता का प्रश्न ही नहीं रहता।
शकुन फल:
यह शकुन सभी कार्यों में सफलता का सूचक है। विशेष रूप से निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कोई भी कार्य या निर्णय जिसमें बड़ों का आशीर्वाद चाहिए
- माता-पिता या परिवार के बुज़ुर्गों से जुड़े प्रश्न
- पारिवारिक मतभेद या घरेलू समस्या का समाधान
- नया कार्य आरंभ करने का शुभ समय
- सहायता या सहयोग मिलने की संभावना
इस दोहे के आने पर सभी कार्यों में सफलता का संकेत मिलता है। अपने बड़ों का आशीर्वाद लेकर कार्य आरंभ करें — सहायता अपेक्षा से अधिक मिलेगी।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।