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रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 1

रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 1 — सीता-राम का वियोग; असमंजस, विदेश-गमन, हानि, पराजय और रोग का सूचक अशुभ शकुन।

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गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। षष्ठम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें पहला दोहा — इस सर्ग के शकुन निर्मल विचार और सत्य आचरण का फल बताते हैं।

सीता-राम का वियोग — भारी असमंजस, विदेश-गमन और हानि का सूचक।

मूल दोहा: असमंजसु बड़ सगुन गत सीता राम बियोग। गवन बिदेस कलेस बड़ हानि पराभव रोग॥१॥

शब्दार्थ:

  • असमंजसु बड़ = भारी असमंजस
  • सगुन गत = इस शकुन का
  • बियोग = वियोग
  • गवन बिदेस = विदेश जाना
  • कलेस बड़ = बड़ा कष्ट
  • हानि = हानि
  • पराभव = पराजय
  • रोग = रोग

असमंजसु बड़ सगुन गत सीता राम बियोग = सीता-राम का वियोग भारी असमंजस का सूचक है। गवन बिदेस कलेस बड़, हानि पराभव रोग = विदेश-गमन, बड़ा कष्ट, हानि, पराजय और रोग।

भावार्थ / व्याख्या:

श्रीसीता-राम का वियोग हो जाने से यह शकुन भारी असमंजस का सूचक है। तुलसीदास जी इसका फल विस्तार से बताते हैं — विदेश जाना होगा, बड़ा कष्ट होगा, हानि, पराजय तथा रोग का शिकार बनना होगा।

यह रामाज्ञा प्रश्न के सबसे कठिन दोहों में से एक है, क्योंकि इसमें एक साथ पाँच प्रतिकूल फल गिनाए गए हैं।

शकुन की दृष्टि से इस दोहे के आने पर हर प्रकार का बड़ा निर्णय स्थगित कर देना चाहिए। विशेषकर यात्रा, स्थान परिवर्तन और स्वास्थ्य के मामले में अत्यंत सावधानी आवश्यक है। परंतु स्मरण रहे — रामकथा में यह वियोग भी अंततः लव-कुश के जन्म का कारण बना।

शकुन फल:

यह शकुन भारी असमंजस, हानि और रोग का सूचक है। सभी प्रश्नों में विशेष सतर्कता:

  • विदेश या दूर जाने का निर्णय
  • स्वास्थ्य और रोग से जुड़ा प्रश्न
  • आर्थिक हानि या पराजय की आशंका
  • किसी अपने से बिछड़ने की स्थिति
  • दुविधा और असमंजस में लिया जा रहा निर्णय

इस दोहे के आने पर हर बड़ा निर्णय स्थगित करें। यात्रा और स्वास्थ्य में विशेष सतर्कता रखें। यह कठिन दौर है, पर स्थायी नहीं — धैर्य रखें।

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