रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 1 श्लोक 6 — श्रीराम-अवतार के समय मास, तिथि, नक्षत्र, लग्न सभी शुभ; मुहूर्त संबंधी सर्वोत्तम शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। यह पहले सप्तक का छठा दोहा है। चतुर्थ सर्ग श्रीराम-जन्म से लेकर चारों भाइयों के विवाह तक के मंगलमय प्रसंगों का सर्ग है।
श्रीराम-अवतार का शुभ मुहूर्त — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: मास पाख तिथि जोग सुभ नखत लगन ग्रह बार। सकल सुमंगल मूल जग राम लीन्ह अवतार॥६॥
शब्दार्थ:
- मास = महीना
- पाख = पक्ष
- तिथि = तिथि
- जोग = योग
- नखत = नक्षत्र
- लगन = लग्न
- ग्रह = ग्रह
- बार = दिन, वार
- लीन्ह अवतार = अवतार लिया
मास पाख तिथि जोग सुभ, नखत लगन ग्रह बार = महीना, पक्ष, तिथि, योग, नक्षत्र, लग्न, ग्रह और दिन — सभी शुभ थे। राम लीन्ह अवतार = श्रीराम ने अवतार लिया।
भावार्थ / व्याख्या:
जिस समय समस्त श्रेष्ठ कल्याणों के मूल श्रीराम ने संसार में अवतार लिया, उस समय महीना, पक्ष, तिथि, योग, नक्षत्र, लग्न, ग्रह तथा दिन — सभी शुभ थे।
यह दोहा ज्योतिष के आठों प्रमुख अंगों को गिनाता है और बताता है कि आठों एक साथ शुभ थे। ऐसा संयोग अत्यंत दुर्लभ होता है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा मुहूर्त और समय-चयन के प्रश्नों में सर्वाधिक शुभ है। यह उन प्रश्नकर्ताओं के लिए स्पष्ट उत्तर है जो पूछ रहे हैं कि ‘क्या यह समय ठीक है?’ — उत्तर है, हाँ, हर दृष्टि से।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है और समय की पूर्ण अनुकूलता बताता है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- शुभ मुहूर्त या तिथि का चयन
- क्या यह समय कार्य के लिए ठीक है
- विवाह, गृह प्रवेश या मांगलिक कार्य का समय
- किसी नए कार्य या यात्रा का आरंभ
- ज्योतिष या ग्रह-दशा से जुड़ा प्रश्न
इस दोहे के आने पर समय हर दृष्टि से शुभ है। मुहूर्त को लेकर कोई संशय न रखें — यह अवसर अत्यंत अनुकूल है।
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