रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 4 श्लोक 1 — हनुमानजी के हृदय-स्मरण से कीर्ति, विजय और श्रेष्ठ ऐश्वर्य; सभी कार्यों के लिए उत्तम समय।
इस ग्रंथ में उत्तर सीधा नहीं, प्रसंग के माध्यम से मिलता है — जो प्रसंग सामने आए, उसी का भाव प्रश्न का फल बन जाता है। यह दोहा तृतीय सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से पहला है — यहाँ विरह, खोज और कठिनाई से पार पाने के संकेत मिलते हैं।
यह सप्तक नाम-स्मरण की महिमा का है — हनुमानजी से आरंभ।
मूल दोहा: सकल काज सुभ समउ भल, सगुन सुमंगल जानु। कीरति बिजय बिभूति भलि, हियँ हनुमानहि आनु॥१॥
शब्दार्थ:
- सकल काज = सभी कार्यों के लिए
- समउ भल = समय उत्तम है
- सुमंगल जानु = कल्याणदायक समझो
- कीरति = कीर्ति
- बिजय = विजय
- बिभूति = ऐश्वर्य
- भलि = श्रेष्ठ
- हियँ = हृदय में लाओ
सकल काज सुभ समउ भल = सभी कामों के लिए उत्तम शुभ समय है। हियँ हनुमानहि आनु = हृदय में हनुमानजी को लाओ।
भावार्थ / व्याख्या:
तुलसीदास जी कहते हैं कि सभी कामों के लिए यह उत्तम शुभ समय है — इस शकुन को कल्याणदायक समझो।
फिर वे एक स्पष्ट उपाय बताते हैं — हृदय में श्रीहनुमानजी का स्मरण करो, जिससे कीर्ति, विजय तथा श्रेष्ठ ऐश्वर्य प्राप्त होगा।
ध्यान दीजिए, इस दोहे में तीन अलग-अलग फल बताए गए हैं — कीर्ति अर्थात् नाम, विजय अर्थात् सफलता, और विभूति अर्थात् समृद्धि। सामान्यतः इनमें से एक भी मिल जाए तो बड़ी बात होती है; यह दोहा तीनों का वचन देता है। शकुन की दृष्टि से यह किसी भी कार्य के लिए पूर्ण अनुकूलता का संकेत है।
शकुन फल:
यह शकुन सभी कार्यों के लिए उत्तम समय बताता है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कोई भी कार्य आरंभ करने का शुभ समय
- नाम, यश और प्रतिष्ठा से जुड़ा प्रश्न
- प्रतियोगिता, संघर्ष या मुकाबले में विजय
- धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की प्राप्ति
- साहस और आत्मबल की आवश्यकता वाला कार्य
इस दोहे के आने पर सभी कार्यों के लिए समय उत्तम है। हनुमानजी का स्मरण करके निःसंकोच आगे बढ़ें — कीर्ति, विजय और ऐश्वर्य तीनों मिलेंगे।
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