रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 1

रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 2 श्लोक 1 — राम, लक्ष्मण और सीता का अनुपम तपस्वी वेष; तप, तीर्थ, जप और यज्ञ का मंगल शकुन।

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इस ग्रंथ में उत्तर सीधा नहीं, प्रसंग के माध्यम से मिलता है — जो प्रसंग सामने आए, उसी का भाव प्रश्न का फल बन जाता है। प्रस्तुत दोहा द्वितीय सर्ग के दूसरे सप्तक में पहला स्थान पर है, जहाँ हर्ष और वियोग — दोनों प्रकार के प्रसंग आते हैं।

तपस्वी वेष में राम, लक्ष्मण और सीता — तप और तीर्थ के लिए मंगल शकुन।

मूल दोहा: सीय राम लोने लखन तापस वेष अनुप। तप तीरथ जप जाग हित सगुन सुमंगल रूप॥१॥

शब्दार्थ:

  • लोने = लावण्यमय, सुंदर
  • तापस वेष = तपस्वी का वेष
  • अनुप = अनुपम, अद्वितीय
  • तप = तपस्या
  • तीरथ = तीर्थयात्रा
  • जप = जप, नाम-स्मरण
  • जाग = यज्ञ
  • हित = के लिए

तापस वेष अनुप = तपस्वी वेष अनुपम है। तप तीरथ जप जाग हित = तपस्या, तीर्थ, जप और यज्ञ के लिए यह शकुन मंगल-सूचक है।

भावार्थ / व्याख्या:

लावण्यमय श्रीराम, लक्ष्मण तथा सीताजी का तपस्वी-वेष अनुपम है। राजसी वस्त्र त्यागकर वल्कल धारण करने पर भी उनका तेज कम नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ गया।

तुलसीदास जी कहते हैं कि तपस्या, तीर्थयात्रा, जप तथा यज्ञ करने के लिए यह शकुन सुमंगल-स्वरूप है।

इस दोहे में एक गहरी शिक्षा है — बाहरी साज-सज्जा नहीं, भीतर का तेज ही असली सौंदर्य है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष शुभ है। साथ ही यह उन प्रश्नों में भी अनुकूल है जहाँ सादगी अपनाकर या खर्च घटाकर आगे बढ़ने का विचार हो।

शकुन फल:

यह शकुन तप, तीर्थ, जप और यज्ञ के लिए मंगल-सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • तीर्थयात्रा या धार्मिक प्रवास
  • जप, अनुष्ठान, व्रत या साधना का आरंभ
  • यज्ञ या हवन का आयोजन
  • सादगी या संयम से जीवन-शैली बदलना
  • आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने का निर्णय

इस दोहे के आने पर धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में शुभ फल का संकेत है। सादगी और संयम इस समय आपके लिए लाभकारी रहेंगे।

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