रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 6 — श्रीराम के अवतार पर अयोध्या के घर-घर उत्सव; संतान-लाभ और आनंद का शुभ शकुन।
तुलसीदास जी की यह कृति प्रश्न और उत्तर की उस प्राचीन पद्धति को जीवित रखती है जिसमें रामकथा ही प्रमाण है। प्रस्तुत दोहा प्रथम सर्ग के दूसरे सप्तक में छठा स्थान पर आता है, जहाँ श्रीराम की महिमा और कार्य-सिद्धि के संकेत मिलते हैं।
यह दोहा श्रीराम के अवतार और अयोध्या के उत्सव का वर्णन करता है।
मूल दोहा: राम जनम घर घर अवध मंगल गान निसान। सगुन सुहावन होइ सत मंगल मोद निधान॥६॥
शब्दार्थ:
- राम जनम = श्रीराम का जन्म, अवतार
- अवध = अयोध्या
- मंगल गान = मंगलगीत
- निसान = नगाड़े, नौबत
- सगुन सुहावन = सुंदर और शुभ शकुन
- होइ सत = सत्य होगा, अवश्य होगा
- मोद निधान = आनंद का भंडार
घर घर अवध मंगल गान निसान = अयोध्या के हर घर में मंगलगीत और नगाड़े बजने लगे। मंगल मोद निधान = कल्याण और प्रसन्नता का भंडार प्राप्त होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीराम का अवतार होने पर अयोध्या के प्रत्येक घर में मंगलगीत गाए जाने लगे और नौबत बजने लगी। पूरा नगर उत्सव में डूब गया।
यह दोहा शकुन की दृष्टि से अत्यंत शुभदायक है। तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन सत्य सिद्ध होगा और कल्याण एवं प्रसन्नता का भंडार — अर्थात् उत्तम संतान — प्राप्त होगी।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि यहाँ उत्सव किसी एक घर में नहीं, ‘घर घर’ हो रहा है। इसका अर्थ है कि इस शकुन का फल केवल प्रश्नकर्ता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे परिवार और आसपास के लोगों तक प्रसन्नता पहुँचेगी।
शकुन फल:
यह शकुन शुभदायक है और विशेषकर संतान-लाभ का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- संतान प्राप्ति, विशेषकर पुत्र-लाभ
- घर में मांगलिक कार्य या उत्सव
- लंबे समय से प्रतीक्षित शुभ समाचार
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि
- कोई ऐसा लाभ जिससे पूरा परिवार प्रसन्न हो
इस दोहे के आने पर घर में उत्सव और आनंद का वातावरण बनने का संकेत मिलता है। प्रतीक्षित शुभ समाचार शीघ्र मिलेगा और उससे पूरा परिवार प्रसन्न होगा।
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